विजय दशमी का दिन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और लोग अपने अपने तरीके से रावण का पुतला बनाकर उसे जलाते हैं और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बताते हैं. लेकिन भारत में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां विजय दशमी के दिन शोक मनाया जाता है. जी हां, ऐसा इसलिए क्योंकि इन जगहों पर दशानन यानी रावण को दुश्मन नहीं बल्कि दामाद माना जाता है. कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी यहीं की रहने वाली थी. ये जगहें राजस्थान के जोधपुर और मध्यप्रदेश के मंदसौर के पास स्थित हैं. सोशल मीडिया पर इन जगहों की अब काफी चर्चा हो रही है जिसे लेकर यूजर्स तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.
यहां रावण को माना जाता है दामाद
दरअसल, राजस्थान के जोधपुर का मंडोर गांव रावण का ससुराल माना जाता है, कहा जाता है कि मंदोदरी का जन्म इसी गांव में हुआ था, इसी वजह से रावण को मंडोर में दामाद का दर्जा दिया जाता है. यहां के कुछ ब्राह्मण समुदाय रावण को अपना दामाद मानकर दशहरे के दिन उसका श्राद्ध और तर्पण करते हैं. एक और जहां देशभर में रावण को जलाकर लोग कंकर मारते हैं वहीं राजस्थान के जोधपुर की यह अनोखी परंपरा लोगों को हैरान कर देती है.
मंदसौर के लोग भी नहीं करते रावण का दहन
दूसरी जगह है मध्यप्रदेश का मंदसौर. माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका मंदसौर में था. यहां के खानपुरा क्षेत्र में नामदेव समाज सहित कई स्थानीय लोग रावण को जमाई राजा मानते हैं और दशहरे के दिन उसके पुतले का दहन करने के बजाए रावण की पूजा करते हैं. यहां रावण की करीब 200 साल पुरानी और 25-35 फीट ऊंची प्रतिमा भी है.
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यूजर्स बोले, इतना प्यार करने वाला ससुराल मिला है
अब सोशल मीडिया पर लोग इन जगहों के बारे में सुनकर हैरानी जता रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि हम तो रावण को अब तक शैतान की शक्ल में ही देखा करते थे, लेकिन रावण किसी का दामाद भी है हमें आज पता चला. एक यूजर ने लिखा…रावण तो भला मानुष निकला. एक और यूजर ने लिखा…रावण भी किसी का बेटा था, किसी का पति था. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…इतना प्यार करने वाला ससुराल रावण को मिला है, कितना खुशनसीब है.
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