देश की सबसे आधुनिक और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर पहली ही बारिश में गंभीर सवाल खड़े कर दिए गए हैं. कोटा से सवाई माधोपुर के बीच, खासकर लबान से सवाई माधोपुर तक एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क को उखड़ा हुआ पाया गया है. वहां बड़े-बड़े गड्ढे देखे गए हैं, जिससे इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के लिए हादसों के खतरे को काफी बढ़ा हुआ माना जा रहा है.
वायरल वीडियो से खड़े किए गए सवाल
एक्सप्रेसवे की बदहाल स्थिति के वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है. वीडियो में सड़क को कई जगह से टूटा और उखड़ा हुआ स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. आम लोगों की तरफ से कहा गया है कि मानसून की शुरुआत में ही सड़क की ऐसी हालत से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं. कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग की इंचार्ज सुप्रिया श्रीनेत की ओर से भी बदहाल एक्सप्रेसवे के वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार पर सवाल उठाए गए हैं.
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राहगीर की ओर से की गई मरम्मत की मांग
वीडियो बनाने वाले कोटा के राहगीर क्रांति तिवारी की तरफ से बताया गया कि करीब सात दिन पहले इस मार्ग से गुजरते समय इस वीडियो को रिकॉर्ड किया गया था. उनके अनुसार कई स्थानों पर सड़क को पूरी तरह खराब पाया गया है, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. संबंधित एजेंसियों से जल्द से जल्द मरम्मत कराए जाने की मांग की गई है. वहीं, सोशल मीडिया पर भी आम जनता की ओर से निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी जताई जा रही है.
NHAI की सख्त कार्रवाई, कंपनी पर एक्शन
इस पूरे मामले पर NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर गजेंद्र सिंह की ओर से बताया गया कि जिस निर्माण कंपनी की तरफ से एक्सप्रेसवे के इस हिस्से का निर्माण किया गया था, उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.
सड़क की मरम्मत का काम अब दूसरी ठेकेदार कंपनी को सौंप दिया गया है और खराब हिस्सों को तेजी से दुरुस्त कराया जा रहा है. यह भी बताया गया है कि क्षतिग्रस्त सड़क का यह हिस्सा सवाई माधोपुर जिले की सीमा में आता है.
फिलहाल मरम्मत का काम जारी रखा गया है, लेकिन जब तक सड़क को पूरी तरह से ठीक नहीं कर लिया जाता, तब तक वाहन चालकों को इस मार्ग पर अत्यधिक सावधानी के साथ सफर करने की सलाह दी गई है. पहली ही बारिश में एक्सप्रेसवे की ऐसी हालत सामने आने से निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए गए हैं.
