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‘विजय थलापति नहीं बना पाते सरकार अगर…’, दिनाकरन का बड़ा खुलासा


तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज होने को लेकर राज्य की राजनीतिक पार्टियों के भीतर मची उथल-पुथल को लेकर अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने खुलासा किया कि AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) और पार्टी के अन्य नेताओं ने इस संभावना पर चर्चा की थी कि अगर TVK प्रमुख विजय राज्य में सरकार बनाने में नाकाम होते, तो VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता था.

दिनाकरन ने कहा, ‘यह कोशिश उस वक्त की गई थी, जब तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) राज्य में अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या हासिल करने में पीछे रह गई थी.’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम का मकसद विजय को सरकार बनाने से रोकना नहीं, बल्कि TVK के विधायकों को दूसरी पार्टियों की तरफ से अपने पाले में करने से रोकना था.

एमके स्टालिन ने कहा था कि DMK सरकार नहीं बनाएगी- दिनाकरन

AMMK महासचिव ने टीटीवी दिनाकरन ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘अगर वामपंथी पार्टियों और थिरुमावलवन ने विजय को अपना समर्थन नहीं दिया होता, तो वे तमिलनाडु में सरकार नहीं बना पाते.’ उनके मुताबिक, तमिलनाडु की वर्तमान में मुख्य विपक्षी पार्टी DMK के प्रमुख एमके स्टालिन ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी सरकार बनाने की कोशिश नहीं करेगी. इसके बाद AIADMK के नेतृत्व में एक वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशने की कोशिशें शुरू हुई थी.

लेफ्ट पार्टियों ने EPS को समर्थन देने से किया था इनकार- दिनाकरन 

हालांकि, लेफ्ट पार्टियों ने पलानीस्वामी को अपना समर्थन देने से इनकार कर दिया था. उन्होंने तर्क दिया था कि पलानीस्वामी का समर्थन करने का मतलब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थन करने के जैसा ही होगा. उन्होंने कहा, ‘इसके बाद हम सभी ने, जिसमें EPS भी शामिल थे, थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कोशिश की.

दिनाकरन ने TVK चीफ से क्या की थी अपील?

इस दौरान दिनाकरन ने यह भी दावा किया कि उन्होंने TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय से अपील की थी कि अगर टीवीके सरकार बनाने के लिए जरूरी नंबर हासिल करने में नाकाम रहती है, तो वह एक वैकल्पिक सरकार को समर्थन देंगे. उन्होंने इस कदम के पीछे के मकसद का स्पष्ट करते हुए कहा कि इस कदम का उद्देश्य टीवीके को सरकार बनाने से रोकना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि उसके विधायकों को संभावनाएं तलाश रही दूसरी पार्टियां अपने पाले में न कर सकें. 

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