मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग बढ़ती जा रही है. देशभर में उनके खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं. विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है. इसी बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने कहा है कि सरकार उन्हें सीधे तौर पर नहीं हटा सकती. उन्हें केवल महाभियोग (इंपीचमेंट) की संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता है.
उन्होंने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जहां तक बात है, तो यह पूरी तरह उनके अपने विवेक पर निर्भर करता है. यदि कोई व्यक्ति किसी भी पद पर बैठा है और वह किसी भी कारण से इस्तीफा देना चाहता है, तो वह किसी भी समय त्यागपत्र दे सकता है. लेकिन जहां तक मुख्य चुनाव आयुक्त या किसी अन्य चुनाव आयुक्त को हटाने का सवाल है, तो सरकार उन्हें सीधे तौर पर नहीं हटा सकती. उन्हें केवल महाभियोग (इंपीचमेंट) की संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता.
धरने की जगह तय होनी चाहिए
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज लोकपाल सिंह ने कहा, विरोध जताने का अधिकार हर किसी को है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध किया और आकाशवाणी भवन में धरना दिया. जहां तक धरने की बात है, तो इसके लिए जगहें तय होती हैं. वे इसके लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति ले सकते हैं. बिना इजाजत किसी को भी विरोध प्रदर्शन करने या किसी सरकारी विभाग के दफ्तर में घुसने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. चाहे वह आकाशवाणी हो, दूरदर्शन हो, सुप्रीम कोर्ट हो या फिर भारत का चुनाव आयोग. थोड़ी जिम्मेदारी की भावना जरूर होनी चाहिए.
अपॉइंटमेंट मांगना चाहिए
उन्होंने कहा, चुनाव आयोग का दफ्तर एक सार्वजनिक कार्यालय है, जहां संवैधानिक अधिकारी बैठते हैं. इसलिए, यदि कोई भी चुनाव आयोग, चाहे मुख्य चुनाव आयुक्त से या किसी अन्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहता है तो पहले इसकी लिखित जानकारी और मिलने का समय मांगने का अनुरोध भेजा जाना चाहिए. बिना पूर्व अनुमति के किसी सार्वजनिक अधिकारी के दफ्तर में घुसना कैसे जायज हो सकता है, चाहे वह चुनाव आयोग का दफ्तर हो या कोई और सरकारी दफ्तर?
जहां तक मुलाकात का सवाल है, वह संसद भवन नहीं है. वह भारत के चुनाव आयोग का कार्यालय है. जो लोग मिलना चाहते हैं, उनका फर्ज है कि वे पहले आवेदन पत्र देकर मिलने का समय मांगें और कहें कि वे अपना ज्ञापन सौंपना चाहते हैं. उन्हें समय देने का अनुरोध करना चाहिए. लेकिन 240 सांसदों को साथ ले आना और भीड़ जमा कर लेना एक तरह से दफ्तर पर दबाव बनाने जैसा है. यह कैसे सही ठहराया जा सकता है? एक साथ 240 सांसदों को मिलने की इजाजत कोई नहीं देगा. अगर आपको ज्ञापन देना है, तो आप दे सकते हैं और चुनाव आयोग की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? अगर भीड़ सीधे दफ्तर के अंदर घुस जाएगी, तो कुछ भी अप्रिय हो सकता है. सुरक्षा भी एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है.
सही दर्ज की गई एफआईआर
राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर पर उन्होंने कहा, जहां तक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसदों पर दर्ज हुई एफआईआर का सवाल है. अगर कोई कानून और तय प्रक्रिया का पालन किए बिना, बिना अनुमति के कहीं घुसा है तो एफआईआर बिल्कुल सही दर्ज की गई है. पुलिस नियमानुसार कार्रवाई करेगी और पुलिस को कानूनी कार्रवाई करनी भी चाहिए.
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