देशभर के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया, योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने दो उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समितियों का गठन किया है, जो 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) पूरा करने वाले छात्रों को सरकारी स्कूल शिक्षक भर्ती और टीईटी परीक्षाओं के योग्य बनाने के लिए नियमों में संशोधन की सिफारिश करेगी. यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है, क्योंकि सत्र 2023-24 में शुरू हुए आईटीईपी कोर्स का पहला बैच 2027 में पास आउट होने वाला है. ऐसे में पहला बैच निकलने से पहले ही भर्ती नियमों और पात्रता परीक्षा के मानदंडों में जरूरी बदलाव पूरे करने की तैयारी की जा रही है.
क्या है ITEP कोर्स और NEP 2020 का टारगेट?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू की गई नई 5+3+3+4 संरचना के अनुसार शिक्षकों को तैयार करने के लिए एनसीटीई ने 2023-24 सत्र में आईटीईपी कोर्स की शुरुआत की थी. इसमें स्कूली शिक्षा को चार चरणों में बांटा है. इसमें फाउंडेशन, स्टेज 5 साल (3 से 8 वर्ष के बच्चों के लिए) प्रिपेरटॉरी स्टेज, 3 साल (8 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए) मिडिल स्टेज, 3 साल (11 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए) सेकेंडरी स्टेज, 4 साल (14 से 18 वर्ष के युवाओं के लिए है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार 2030 तक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए 4 साल की यह आईटीईपी न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बन जाएगी.
BEd से कितना अलग है ITEP?
अब तक उम्मीदवार 12वीं के बाद 3 साल का ग्रेजुएशन करते थे और उसके बाद 2 साल का बीएड या डीएलएड करते थे, जिसमें कुल 5 साल का समय लगता था. लेकिन आईटीईपी छात्र 12वीं के बाद के तुरंत बाद 4 साल में अपनी स्नातक और शिक्षक शिक्षा की डिग्री एक साथ पूरी कर सकते हैं. एनसीटीई के 12 अक्टूबर के आदेश के अनुसार देशभर के 409 उच्च शिक्षण संस्थानों को आईटीईपी कोर्स संचालित करने की मान्यता दी जा चुकी है, जिनमें 777 यूनिट के तहत 38,850 सीटों पर एडमिशन दिए जा रहे हैं.
2 एक्सपर्ट समितियां गठित की गई
एनसीटीई की ओर से जारी आदेशों के अनुसार दोनों समितियां मौजूदा नियमों की समीक्षा कर भर्तभ् और टीईटी निर्देशों में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार करेगी. इसमें पहली समिति भर्ती नियमों में संशोधन करेगी, इसके अध्यक्ष पूर्व आईएएस अधिकारी प्रो. निर्मलजीत सिंह कलसी है. पहली समिति का गठन एनसीटीई के 2014 के भर्ती योग्यता नियमों में संशोधन कर आईटीईपी को मान्यता प्राप्त न्यूनतम योग्यता के रूप में शामिल करना है. वहीं दूसरी समिति का के अध्यक्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रो. चंद किरण सलूजा है. दूसरी समिति का काम सीटीईटी और राज्य एसटीईटी की मौजूदा गाइडलाइंस की समीक्षा कर आईटीईपी ग्रेजुएट को परीक्षा में बैठने योग्य बनाना है.
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