शिवसेना (UBT) की उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना की आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दी गई थी. सुनवाई के दौरान शिवसेना (UBT) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा. इस बीच पार्टी सांसद संजय राउत ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह गैरकानूनी बताया.
संजय राउत ने कहा, “संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार, इस मामले सहित ऐसी किसी भी कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट रूप से निर्धारित है कि ऐसे सभी लोगों को अयोग्य ठहराया जाएगा और उनके पद से हटा दिया जाएगा.”
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उन्होंने आगे कहा, “शिवसेना का चुनाव चिह्न और मूल शिवसेना उन्हें पूरी तरह अवैध तरीके से सौंप दी गई. इसमें न किसी नियम का पालन किया गया, न कानून का और न ही संविधान के किसी प्रावधान का. आज भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कपिल सिब्बल ने यही तर्क रखा.”
सुप्रीम कोर्ट में क्या है मामला?
शिवसेना (UBT) ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शिवसेना की आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दी गई थी. साथ ही पार्टी का चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट को आवंटित किया गया था. UBT का कहना है कि यह फैसला संविधान, कानून और तय प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है.
इस मामले को महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है. आने वाले समय में अदालत का फैसला यह तय करेगा कि चुनाव आयोग का निर्णय कानूनी कसौटी पर कितना सही ठहरता है. फिलहाल, शिवसेना (UBT) लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है और अदालत में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखे हुए है.
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