- 135 साल पुराने बैंकिंग कानून में सुधार किए गए हैं।
मानसून सत्र के 16वें दिन मंगलवार (10 अगस्त, 2026) को संसद ने ‘द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ को पारित कर दिया है. मोदी सरकार की तरफ से इस बिल को पिछले हफ्ते सोमवार (3 अगस्त, 2026) को संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में पेश किया गया था. जहां यह बिल अगले दिन मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को ही लोकसभा से पारित हो गया था. इसके बाद इसे राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया, जहां सोमवार (10 अगस्त) को यह बिल पास हो गया और अब इसके कानूनी रूप लेने का रास्ता साफ हो गया है.
विपक्ष बिल पर चर्चा से ज्यादा वॉकआउट को देता है महत्व- सीतारमण
इस विधेयक को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (10 अगस्त, 2026) को राज्यसभा में कहा, ‘यह ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक हैं, जिसमें वास्तव में विपक्ष को रुचि लेनी चाहिए और इसके लिए हो रही चर्चा में भाग भी लेना चाहिए. ये बहुत ही रिफॉर्मेट्री यानी सुधारों वाला विधेयक है.’
उन्होंने कहा, ‘ये विधेयक देश को तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ने में मदद करेंगे. यह ऐसे कदम हैं, जिन पर किसी को भी आपत्ति नहीं हो सकती है, सिवाय ऐसे लोगों के, जो इनमें किसी भी तरह के सुधार के लिए सुझाव देना चाहते हों. इसलिए यह बहुत ही दुखद स्थिति है कि हमारा विपक्ष इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा करने या बहस में भाग लेने से ज्यादा सदन से वॉकआउट करने को प्राथमिकता देता है.’
These are the kind of Bills (The Bankers’ Books Evidence Bill, 2026) on which the Opposition should actually take interest and participate. These are very reformatory.
These are going to help the country move forward fast. And these are steps on which no one can have a… pic.twitter.com/rojVOTgCdc
— Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) August 10, 2026
पुराने कानून में क्यों किया गया बदलाव?
दरअसल, 135 साल पुराने इस कानून का मुख्य उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड्स की सर्टिफाइड कॉपियों को कानूनी कार्यवाही में सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी देना था. इससे बैंक अधिकारियों को हर बार अदालतों में असली बही-खाते और रिकॉर्ड्स को भौतिक रूप से पेश करने की परेशानी से बचाया जा सकता है.
बिल में क्या किए गए बदलाव?
इस बिल में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बैंकर्स बुक्स की परिभाषा का विस्तार है. पुराने कानून में बैंकर्स बुक्स को सिर्फ ऐसे रिकॉर्ड के रूप में बताया गया था, जो लिखित रूप में रखे गए हों या माइक्रोफिल्म, मैग्नेटिक टेप या किसी अन्य मेकेनिकल या इलेक्टॉनिक डेटा-रिट्रीवल माध्यम में सुरक्षित गया हो. जबकि साल 2026 का विधेयक उन रिकॉर्ड्स को भी सबूतों के रूप में मान्यता देता है, जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल फॉर्म, अन्य रूप में ऑनसाइट या किसी ऑफसाइट, वर्चुअल या क्लाउड लोकेशन पर सुरक्षित रखे गए हों.
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