उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव के निलंबन का मामला अब सियासी बहस का विषय बन गया है. फिरोजाबाद की जसराना सीट से विधायक सचिन यादव को सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोटो लेकर विरोध प्रदर्शन करना भारी पड़ गया. विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उन्हें सदन की कार्यवाही से अगले दो दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया. इस कार्रवाई के बाद सपा विधायक पल्लवी पटेल ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया.
पल्लवी पटेल ने सरकार पर साधा निशाना
सचिन यादव के निलंबन पर सपा विधायक पल्लवी पटेल ने कहा, “हम सभी 403 विधायक जब इस सदन में आते हैं, इस मंडप में आते हैं, तो जन सरोकार के जो मुद्दे हैं, उनको लेकर हमारी यह नैतिकता है, हमारा यह दायित्व है कि सरकार से हम सवाल पूछें. जिस राम के नाम पर यह सरकार सत्ता में आई है, अगर हमारी श्रद्धा से दिए हुए उस चढ़ावे की चोरी होगी, तो 403 विधायक यहां खड़े होकर सरकार से सवाल तो जरूर पूछेंगे.”
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उन्होंने आगे कहा, “अगर उसका जवाब नहीं मिलेगा, तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि उससे सवाल होते हैं और विरोध प्रदर्शन होता है.”
पल्लवी पटेल ने कहा, “आज सदन में हमारी आवाज को, चाहे आरक्षण के मुद्दे को लेकर हो, चाहे शिक्षा के मुद्दे को लेकर हो, चाहे नौकरी के मुद्दे को लेकर हो और चाहे चढ़ावा चोरी को लेकर हो, इन तमाम मुद्दों पर विपक्ष की आवाज को दबाने का जो प्रयास किया जा रहा है और हर बार नियम का हवाला दिया जाता है, यह कहीं न कहीं लोकतंत्र को कमजोर करता है.”
Lucknow, Uttar Pradesh: SP MLA Pallavi Patel says, “When all 403 of us MLAs come to the House, it is our moral duty and responsibility to question the government on issues of public concern. Regarding the very Lord Ram in whose name this government came to power, if the offerings… pic.twitter.com/9UU9V1z1Bu
— IANS (@ians_india) August 4, 2026
दो दिनों तक सदन की कार्यवाही में नहीं होंगे शामिल
जसराना से सपा विधायक सचिन यादव विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोटो लेकर विरोध जता रहे थे. इसके बाद सदन में हंगामे की स्थिति बनी और विधानसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई करते हुए उन्हें अगले दो दिनों के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया. अब वह इस अवधि में विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे.
सचिन यादव के निलंबन के बाद विधानसभा के भीतर और बाहर सियासी माहौल गर्म हो गया है. विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि सदन की कार्यवाही और नियमों को लेकर सरकार का पक्ष भी अहम माना जा रहा है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच और तीखी बहस देखने को मिल सकती है.
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