मध्य प्रदेश की सागर पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग का नेटवर्क संचालित करने वाले और फर्जी फर्मों और म्यूल बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन करने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 आरोपी फरार बताए गए हैं. एसपी अंनुराग सुजानिया ने आज मीडिया के सामने पूरे मामले का खुलासा किया.
एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक भोपाल से पकड़े गये दो मुख्य आरोपियों के कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं.
बेरोजगार लोगों के दस्तावेजों से खुलवाते थे फर्जी खाते
सागर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार एवं सामान्य लोगों को कमीशन और पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज प्राप्त करते थे. इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार की जाती थीं और निजी बैंकों में उनके नाम से करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे. बाद में इन बैंक खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन एवं सर्कुलेशन के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था.
भोपाल में Gen-Alpha प्रोटेस्ट, सड़क पर उतरे रीजनल स्कूलों के 400 बच्चे
शिकायत से खुला करोड़ों के नेटवर्क का राज
13 अगस्त 2026 को मकरोनिया थाने में रोहित पिता रूपराज पटेल ने शिकायत की थी कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया. पुलिस ने खाते की जांच की तो सामने आया कि रोहित के नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नामक फर्म बनाई गई थी. फरवरी 2026 से करीब छह महीने के दौरान इस खाते में लगभग 90 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था.
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेंद्र सोलंकी के पर्यवेक्षण में मकरोनिया थाना प्रभारी निरीक्षक नितिन पाल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई. टीम ने बैंक खातों, फर्मों, लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया.
भोपाल और मुंबई से जुड़े तार
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी धर्मेंद्र नाहर ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और बैंक खातों के नेटवर्क से जुड़ा काम अमित विश्वकर्मा से सीखा था. इसके बाद धर्मेंद्र ने सागर के स्थानीय साथी सोनू दांगी तथा सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी और स्वर्णेंद्र पांडे के साथ मिलकर फर्जी फर्में तैयार कर बैंक खाते खुलवाने का काम शुरू किया.
पुलिस के मुताबिक, ऑनलाइन बेटिंग का संचालन रिषभ पटेल द्वारा किया जा रहा था. पुलिस टीम ने रिषभ पटेल को गिरफ्तार किया. उसके कब्जे से 2,69,42,700 रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये का सोना बरामद हुआ.
टेलीग्राम ग्रुप के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में रिषभ पटेल ने बताया कि वह ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों और अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से सट्टा खिलाता था. फर्जी फर्मों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराकर उसे नकद निकाला जाता था.
आरोपी ने कथित तौर पर टेलीग्राम के माध्यम से ग्राहकों का ग्रुप बना रखा था. इस नेटवर्क के जरिए ग्राहकों को ऑनलाइन सट्टेबाजी पैनल की लिंक और क्रेडिट कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे. आरोपी भोपाल से आनलाईन बैटिंग वेबसाईट 61www.20wicket.com और www.goexch99.com व अन्य वेबसाईट से आनलाईन बैटिंग खिलाते थे .
पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आरोपियों अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को न्यायालय से 8 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है. उनसे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन के संबंध में पूछताछ की जा रही है.
इन फर्जी फर्मों का खुलासा
पुलिस के तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है. इनमें से जांच में सामने आई प्रमुख फर्में हैं—
1. ग्लैमर इंटरप्राइजेस
2. भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस
3. सूर्या इंटरप्राइजेस
4. समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स
5. लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर
6. कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स
7. स्टार इंटरप्राइजेस
8. राजपूत इंटरप्राइजेस
9. अनुभव ट्रेडर्स
10. सागर ट्रेडर्स
11. शर्मा जी इंटरप्राइजेस
12. सौरभ इंटरप्राइजेस
13. माखन इंटरप्राइजेस
14. अंकेश इंटरप्राइजेस
15. तनविक इंटरप्राइजेस
16. यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स
17. महाकाल ट्रेडर्स
18. मैक्स ट्रेडर्स
19. बालाजी ट्रेडर्स
20. जय महाकाल टूर एंड ट्रेवल्स
पुलिस के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में इन फर्मों से संबंधित बैंक खातों में करीब 5.50 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन पाया गया है. पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है.
फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
सागर पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खातों को खुलवाने की प्रक्रिया में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही. पुलिस के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म पंजीयन या बैंक खाते खोलने में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
ये आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में निम्न आरोपियों की गिरफ्तारी की है
- धर्मेंद्र पिता हरिदास नाहर, निवासी खजुराहो, छतरपुर, हाल शिवनगर, थाना बहेरिया, सागर.
- सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, सागर.
- अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी इंदौर, हाल रोहित नगर, भोपाल.
- विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, निवासी नीरजा नगर, जेके रोड, भोपाल.
- स्वर्णेंद्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, निवासी पीताम्बरा होम्स, खजूरी कला, भोपाल.
- रिषभ पटेल पिता स्वर्गीय रवि पटेल, निवासी मंडला, वर्तमान पता भोपाल.
दो आरोपी फरार
पुलिस के अनुसार सरमन उर्फ शुभम रैकवार निवासी खजुराहो, छतरपुर, वर्तमान पता भोपाल तथा ऋषि केशव सिंह निवासी सीधी, वर्तमान पता भोपाल फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं.
पुलिस की नागरिकों से अपील
सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा अन्य बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं. पुलिस ने यह भी चेताया है कि किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन दूसरे व्यक्ति को देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है. यदि ऐसे खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी अथवा अन्य अवैध गतिविधियों की रकम के लेन-देन में होता है तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है.
Exclusive: शादी कब करेंगे बाबा बागेश्वर, कैसी कन्या चाहते हैं? खुद बताया
