पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए बीच हुए ‘मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ ने मिडिल ईस्ट से लेकर साउथ एशिया तक की जियो पॉलिटिक्स में नए बदलाव के संकेत दिए हैं. इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कहा कि मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट यह दिखाता है कि मिडिल ईस्ट और आसपास के देशों का अमेरिका को लेकर नजरिया बदल रहा है.
‘क्षेत्रीय सुरक्षा विदेशी ब्रोकर से नहीं खरीदी जा सकती’
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोमवार (10 अगस्त 2026) को कहा कि पिछले दो-तीन सालों के दौरान इस क्षेत्र में हुए घटनाक्रमों से देशों को यह समझ आ गया है कि सुरक्षा कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे अमेरिका विदेशी ब्रोकर से खरीदा जा सके. IANA की रिपोर्ट के मुताबिक बकाई ने कहा, इस समझौते से ईरान को चिंतित होने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के साथ ईरान के गहरे धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं.’
मक्का डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होगा ईरान?
उन्होंने कहा कि सुरक्षा को लेकर कोई भी प्लानिंग जो इस क्षेत्र के जियो पॉलिटिक्स पर आधारित होगी और असली खतरा जैसे इजरायल की पहचान करेगी, वह क्षेत्र में स्थिरता लाने और दुश्मनों की साजिशों को रोकने में मददगार साबित होगी. मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में ईरान के शामिल होने की संभावना पर प्रवक्ता ने कहा कि ईरान हमेशा से बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय देशों के आपसी सहयोग से सुरक्षा तंत्र बनाने के पक्ष में रहा है. उन्होंने कहा कि पुराने प्रस्ताव अभी भी मौजूद हैं और बदलते माहौल के हिसाब से उन्हें अपडेट किया जा सकता है.
समझौते पर पाकिस्तान का रुख
पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने साफ किया है कि यह मक्का रक्षा समझौता पूरी तरह से आत्मरक्षा के लिए है और किसी भी देश के खिलाफ नहीं है. उन्होंने बताया कि यह समझौता क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बढ़ाने के लिए किया गया है. पाकिस्तान ने ये भी कहा, यह समझौता किसी अन्य देश के लिए बंद नहीं है. क्षेत्र का कोई भी देश जो इसके सिद्धांतों को मानने को तैयार हो वो इसमें शामिल हो सकता है. मिस्र के भी इस समझौते से जुड़ने की संभावना जताई जा रही है.
