- सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग’ 10 नवंबर 2026 को आएगी।
- शुरुआती प्रकाशक पेंगुइन संवेदनशील अंशों पर मतभेद से हटा।
- मोदी, संघ, चीन संबंधी संवेदनशील अंश हटाने का था प्रस्ताव।
- राजनीतिक दबाव के आरोप के बाद हार्पर कॉलिन्स करेगा प्रकाशित।
Sonia Gandhi Book: राजनीतिक नेताओं की किताबें अक्सर ही भारत की राजनीतिक गलियों में विवाद पैदा करती रहती हैं. हाल ही में बहस कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की किताब बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव से जुड़ी हुई है. उन्होंने हाल ही में इंस्टाग्राम पर किताब की पहली झलक साझा करते हुए शुरुआत की. आपको बता दें कि यह किताब 10 नवंबर 2026 को भारत में लॉन्च होने जा रही है.
शुरुआत में इस किताब के पेंगुइन रेंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित होने की उम्मीद थी. हालांकि किताब के कुछ हिस्सों को लेकर प्रकाशक और सोनिया गांधी की टीम के बीच मतभेद सामने आए और पेंगुइन इस किताब को छापने के काम से पीछे हट गया. रिपोर्ट के मुताबिक प्रकाशक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चीन के साथ सीमा गतिरोध और अल्पसंख्यक संबंधी मुद्दों से संबंधित संवेदनशील हिस्सों को हटाने या फिर बदलने का प्रस्ताव दिया था. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रकाशक को सरकार के राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा. लेकिन अब यह किताब हार्पर कॉलिन्स इंडिया प्रकाशित कर रहा है. आइए जानते हैं कि भारत में किन नेताओं की किताबें विवाद की वजह बन चुकी हैं.
जसवंत सिंह की जिन्ना किताब
पूर्व भाजपा नेता जसवंत सिंह की जिन्ना: इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस मैं मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा की गई थी और बंटवारे के लिए आंशिक रूप से जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया गया था. किताब के तर्क पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और जसवंत सिंह को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया. इतना ही नहीं बल्कि गुजरात ने पुस्तक पर प्रतिबंध भी लगा दिया.
2004 के बारे में नटवर सिंह का दावा
वन लाइफ इज नॉट इनफ में पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह ने दावा किया कि सोनिया गांधी ने 2004 में प्रधानमंत्री पद से इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें राहुल गांधी की सुरक्षा का डर था. इसके बाद कांग्रेस पार्टी नाराज हो गई.
द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर से राजनीतिक भूचाल ला दिया था. किताब में यह तर्क दिया गया था कि मनमोहन सिंह के पास कार्यालय से जुड़े वास्तविक अधिकार का अभाव था और सोनिया गांधी के पास सरकार का रिमोट कंट्रोल था.
आजाद के रोके गए पन्ने
मौलाना अबुल कलाम आजाद की इंडिया विंस फ्रीडम को उनकी वसीयत के मुताबिक 30 साल तक गोपनीय रखे गए 30 पेज के साथ प्रकाशित किया गया था. जब अंत में पेज जारी किए गए तो विभाजन पर नेहरू और पटेल के फैसलों की उनकी तीखी आलोचना ने एक बड़ा विवाद पैदा कर दिया था.
जनरल एम एम नरवणे की किताब
पूर्व सेवा प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी लंबे वक्त तक विवाद में उलझी रही. इसके पीछे वजह यह थी कि रक्षा मंत्रालय ने इसे मंजूरी नहीं दी थी. जब राहुल गांधी ने कॉपी पकड़ी तो संसद में हंगामा हो गया. संस्मरण में चीनी सीमा प्रतिरोध और अग्निपथ भर्ती योजना की शुरुआती विकास पर चर्चा की गई है.

जिन्ना पर आडवाणी की टिप्पणी
माई कंट्री माई लाइफ में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताया और बाबरी मस्जिद विध्वंस के आसपास की घटनाओं का जिक्र किया. दोनों ही अंशों पर आरएसएस और आडवाणी की अपनी पार्टी के अंदर तीखी प्रतिक्रियाएं हुई.
शरद पवार और कांग्रेस की अंदरूनी कलह
अपनी शर्तों पर किताब में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल, कांग्रेस छोड़ने के उनके फैसले और 1990 के दशक के दौरान पार्टी के अंदर आंतरिक सत्ता संघर्ष के बारे में जानकारी दी. इन खुलासों से कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गए.
2014 की हार का मुखर्जी का लेखा-जोखा
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की द प्रेसिडेंशियल इयर्स ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के लिए सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया. प्रकाशन ने मुखर्जी के बेटे और बेटी के बीच सार्वजनिक सोशल मीडिया विवाद को भी जन्म दिया.
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मार्गरेट अल्वा और एम ओ मथाई की किताब
करेज एंड कमिटमेंट में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा ने कथित पार्टी टिकट बिक्री और अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले से संबंधित फसलों पर गंभीर सवाल उठाए. इस वजह से पार्टी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाना पड़ा.
इसी के साथ जवाहरलाल नेहरू के पूर्व निजी सचिव एम ओ मथाई ने रेमिनिसेंस ऑफ द नेहरू एज से एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया. इसमें नेहरू परिवार के निजी जीवन पर चर्चा की गई थी. काफी ज्यादा विरोध और दबाव की वजह से “शी” नाम के काफी संवेदनशील चैप्टर को पूरी तरह से हटा दिया गया.
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