- दिल्ली के प्रशांत विहार में स्पेशल 26 की तरह फर्जी सीबीआई रेड की कोशिश
- वारंट मांगने पर परिवार को धमकाया, पुलिस ने 7 आरोपियों को पकड़ा
- बैंक कर्मचारी ने जानकारी दी, दो महिलाओं ने बनाया प्लान
दिल्ली के प्रशांत विहार में फिल्म स्पेशल 26 की तर्ज पर फर्जी CBI रेड डालने का मामला सामने आया है. आठ लोगों का एक गिरोह खुद को CBI अधिकारी बताकर एक परिवार के घर पहुंच गया.आरोपियों ने फर्जी आईडी कार्ड दिखाए और घर में तलाशी लेने की बात कही.परिवार ने जब उनसे सर्च वारंट और कार्रवाई की मंजूरी से जुड़े दस्तावेज मांगे तो आरोपी धमकाने लगे. करीब डेढ़ घंटे तक घर के बाहर खड़े रहकर उन्होंने परिवार पर दबाव बनाए रखा. पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
रात में अचानक पहुंचा गिरोह, खुद को बताया CBI अफसर
घटना 11 अगस्त की रात करीब 10 बजे की है.प्रशांत विहार निवासी प्रथम अग्रवाल अपनी मां के साथ घर पर थे. इसी दौरान करीब आठ लोग उनके घर के बाहर पहुंचे. इनमें छह पुरुष और दो महिलाएं थी.आरोपियों ने खुद को CBI का अधिकारी बताया और कहा कि उन्हें घर में रेड करनी है. इसके बाद उन्होंने परिवार से घर में दाखिल होने देने को कहा.
वारंट मांगा तो पीड़ित को दी धमकी
प्रथम और उनकी मां को शक हुआ तो उन्होंने आरोपियों से CBI की कार्रवाई का अधिकार पत्र और सर्च वारंट दिखाने को कहा. आरोप है कि इस पर आरोपी भड़क गए और परिवार को डराने-धमकाने लगे.वे करीब डेढ़ घंटे तक घर के बाहर खड़े रहे. इस दौरान परिवार को आशंका थी कि कहीं आरोपी जबरन घर में दाखिल न हो जाएं.
ये भी पढ़ें: दिल्ली: कनाडा जा रहे पार्सल से खुला ‘नार्को-टेरर’ का राज, 4 अरेस्ट
पड़ोसियों के आने पर बदली कहानी
मामला बिगड़ता देख आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए. इसके बाद आरोपियों ने कहा कि प्रथम के पिता के नाम CBI का नोटिस आया है और वह उनकी गाड़ी में रखा है. आरोपी नोटिस लाने के बहाने वहां से चले गए.इसके बाद प्रथम ने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर पूरी घटना की जानकारी दी.
मोबाइल पर भेजा फर्जी नोटिस, डिलीट भी कर दिया
पुलिस के मुताबिक प्रथम के पिता के मोबाइल पर कथित CBI नोटिस भी भेजा गया था. बाद में यह मैसेज डिलीट कर दिया गया.लेकिन परिवार ने उसका स्क्रीनशॉट सुरक्षित रख लिया. पुलिस ने इसी स्क्रीनशॉट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई.
शुरुआती जांच में नोटिस के फर्जी होने का शक हुआ.
CCTV और मोबाइल ने खोली गिरोह की पोल
प्रशांत विहार पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर CCTV फुटेज खंगाली.इसके साथ आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत और मोबाइल फोन की जांच की गईतकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस एक-एक कर आरोपियों तक पहुंची. जांच के आधार पर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
बैंक में काम कर चुका आरोपी ही दे रहा था घर की जानकारी
जांच में पुलिस को गिरोह के काम करने का तरीका भी पता चला. पुलिस के अनुसार, 63 वर्षीय कुलदीप शर्मा पहले SBI और ING Vysya Bank में काम कर चुका है. बैंक में नौकरी के दौरान उसकी शिकायतकर्ता से जान-पहचान हुई थी.आरोप है कि उसने परिवार के बारे में जानकारी जुटाकर आसिफा और पूजा को दी. इसी जानकारी के आधार पर घर को निशाना बनाया गया.
दो महिलाओं ने संभाली पूरी प्लानिंग
पुलिस के मुताबिक आसिफा और पूजा अग्रवाल इस पूरे खेल की मुख्य कड़ी थीं. आसिफा पहले राजेंद्र प्लेस में होटल चलाती थी.आरोप है कि वह खुद को पुलिस और सेना से जुड़े लोगों के संपर्क में बताती थी. करीब आठ महीने पहले एक शादी में उसकी मुलाकात कुलदीप शर्मा से हुई थी. यहीं से शिकायतकर्ता के बारे में जानकारी मिलने की बात सामने आई है.
पूजा ने जीजा के जरिए जुटाए फर्जी अफसर
पूजा पहले बार और रेस्तरां में सिंगर के तौर पर काम करती थी पुलिस के अनुसार उसने अपने जीजा चंदर प्रकाश शर्मा से फर्जी रेड के लिए लोगों की व्यवस्था करने को कहा. चंदर कथित तौर पर बबलू, दो सिख युवकों और अन्य लोगों को लेकर मौके पर पहुंचा था. पुलिस अब इन अन्य लोगों की पहचान और भूमिका भी पता कर रही है.
CBI लिखा कपड़ा और फर्जी आईडी की तस्वीरें बरामद
पुलिस ने चंदर प्रकाश के पास से CBI मोनोग्राम वाले कपड़े बरामद किए हैं. उसके मोबाइल फोन में कथित फर्जी CBI पहचान पत्रों की तस्वीरें भी मिली हैं. इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन पुलिस ने कब्जे में लेकर डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है.
हर फर्जी रेड के बदले मिलते थे पैसे
पुलिस के मुताबिक, चंदर के जरिए शुभम उर्फ गोलू, राजवीर सिंह और नितिन शर्मा भी गिरोह में शामिल हुए.पूछताछ में इन आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें हर फर्जी रेड में शामिल होने के बदले पैसे दिए जाते थे.पुलिस को शक है कि यह गिरोह सिर्फ एक वारदात तक सीमित नहीं था.
तीन चार महीने से चल रहा था खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब तीन से चार महीने से इसी तरह लोगों को निशाना बना रहे थे. पहले किसी ऐसे व्यक्ति की जानकारी जुटाई जाती थी जिसके पास नकदी या कीमती सामान होने का शक हो.फिर CBI अधिकारी बनकर उसके घर पहुंचते थे. फर्जी आईडी और दस्तावेज दिखाकर रेड का डर पैदा किया जाता था और कथित तौर पर पैसे या कीमती सामान ऐंठने की कोशिश होती थी.
पुलिस अब पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ रही
प्रशांत विहार पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगा रही है कि उन्होंने इससे पहले कितने लोगों को इसी तरह निशाना बनाया.साथ ही मौके से फरार हुए अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है. पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ में फर्जी CBI रेड से जुड़े और मामलों का भी खुलासा हो सकता है.
ये भी पढ़ें: दिल्ली: पत्नी ने CCTV बंद किया, मायके से आए 6 लोग… 12 मिनट इंजीनियर विनय गुप्ता की हत्या!
