Headlines

स्पेस में डेटा सेंटर बनाना चाह रहीं कंपनियां, ये हैं चिंताएं


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • एआई मांग से डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ी, कंपनियाँ अंतरिक्ष देख रहीं।
  • असीमित ऊर्जा और भू-उपयोग समस्या से बचने को अंतरिक्ष विकल्प।
  • वैज्ञानिक उपग्रहों से पर्यावरणीय खतरों पर विस्तृत जांच चाहते हैं।

AI Data Centers In Space: एआई बूम के कारण अब डेटा सेंटर की डिमांड बढ़ी है और कंपनियों ने इनके लिए स्पेस की ओर देखना शुरू कर दिया है. स्पेसएक्स, जेफ बेजोस की ब्लू ऑरिजन और गूगल जैसी कंपनियां स्पेस में डेटा सेंटर बनाने पर विचार कर रही हैं. पिछले महीने स्पेसएक्स ने ऐलान किया था कि स्टारमाइंड प्रोजेक्ट के तहत वह स्पेस में 10 लाख एआई सैटेलाइट भेजना चाहती है. कंपनियों को अनलिमिटेड सोलर पावर और धरती पर डेटा सेंटर लगाने के झंझट से बचने के लिए स्पेस एक सुरक्षित जगह लग रही है, लेकिन हर कोई इससे सहमत नहीं है. वैज्ञानिकों के एक समूह ने अमेरिका के फेडरल कमीशन ऑफ कम्युनिकेशन (FCC) से मांग की है कि सैटेलाइट के बड़े डिप्लॉयमेंट से पहले उसके संभावित खतरों को देखने की जरूरत है.

एआई के लिए डेटा सेंटर क्यों जरूरी?

इंटरनेट की तरह ही एआई सर्विसेस को फंक्शन करने के लिए कंप्यूटर सर्वर की जरूरत पड़ती है. जिस स्तर पर एआई का इस्तेमाल हो रहा है, उसे देखते हुए बड़े-बड़े सर्वर जरूरी हैं. इन सर्वर को डेटा सेंटर में रखा जाता है. डेटा सेंटर कैपेसिटी के हिसाब से कई एकड़ में फैले हो सकते हैं. डेटा सेंटर पिछले कई सालों से मौजूद हैं, लेकिन एआई आने के बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है. इन डेटा सेंटर को चलाने के लिए बिजली की जरूरत पड़ती है. जब ये सर्वर चलते हैं तो हीट जनरेट होती है. इस हीट को काबू में रखने और सर्वर का टेंपरेचर बढ़ने से रोकने के लिए डेटा सेंटर को कूलिंग की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में पानी का इस्तेमाल किया जाता है. एक डेटा सेंटर किसी एक बड़े शहर की जरूरत के बराबर पानी और बिजली इस्तेमाल कर सकता है. इस कारण कई जगहों पर डेटा सेंटर का विरोध भी होने लगा है. 

अब कंपनियों की नजरें स्पेस पर

बिजली-पानी की जरूरत और विवाद आदि से बचने के लिए कंपनियों ने अब अपनी नजरें स्पेस पर टिका ली हैं. इससे कंपनियों को एक साथ दो फायदे होंगे. स्पेस में अनलिमिटेड सोलर एनर्जी है, जिससे कंपनियों की इलेक्ट्रिसिटी पर निर्भरता कम हो जाएगी. दूसरा स्पेस में लैंड यूज की तरह कोई झंझट नहीं है. स्पेस में फ्लोटिंग डेटा सेंटर बनेंगे और इनके लिए किसी तरह की जमीन की जरूरत नहीं पड़ेगी. गूगल ने इस कॉन्सेप्ट को एक लंबी रिसर्च का विषय बताया है. कंपनी एलन मस्क की स्पेसएक्स के साथ मिलकर ऑर्बिट में कंप्यूटिंग हार्डवेयर लॉन्च करने पर विचार कर रही है. इसी तरह अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस का मानना है कि अगले 10-20 साल में स्पेस में डेटा सेंटर बन जाएंगे.

इन खतरों की तरफ ध्यान दिलाना चाहते हैं वैज्ञानिक

पर्यावरण के लिए काम करने वाले कई समूहों का कहना है कि हमें सिर्फ स्पेस में डेटा सेंटर के फायदों के बारे में नहीं सोचना चाहिए. इन समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले Earthjustice ने FCC से सैटेलाइट से जुड़े प्रोजेक्ट के विस्तृत रिव्यू की मांग की है. वैज्ञानिकों को डर है कि सैटेलाइट की संख्या में अंधाधुंध बढ़ोतरी से एटमॉस्फेरिक पॉल्यूशन बढ़ने, ओजोन लेयर के डैमेज होने, स्पेस में कचरा बढ़ने और रात के समय नजर आने वाले आसमान की अपीयरेंस तक बदलने काे खतरे हैं. इससे लोगों के डेली जीवन के साथ-साथ पृथ्वी के भविष्य पर असर पड़ेगा. वैज्ञानिकों ने यह चिंता भी जताई है कि इससे वाइल्डलाइफ के साथ-साथ इंसान की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है. इससे पहले कई एक्सपर्ट्स ने यह वॉर्निंग भी दी थी कि स्पेस में सैटेलाइट की लगातार बढ़ती संख्या से दुनियाभर के टेलीस्कोप से ऑब्जर्वेशन मुश्किल हो जाएगी. यानी धरती पर लगे तगड़े से तगड़े टेलीस्कोप भी अंतरिक्ष में हो रहीं गतिविधियों को नहीं देख पाएंगे.
स्पेस में डेटा सेंटर बनाना चाह रहीं कंपनियां, ये हैं चिंताएं

स्पेस में तेजी से बढ़ रही है सैटेलाइट की संख्या

European Southern Observatory (ESO) का कहना है कि पिछले कुछ सालों में सैटेलाइट की संख्या तेजी से बढ़ी है. इस समय अकेली स्टारलिंक के 10,400 सैटेलाइट धरती के चक्कर लगा रहे हैं. 2022 से पहले तक स्पेस में मौजूद कुल सैटेलाइट की संख्या ही 14,450 थी. अब कंपनियां और भी ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने की प्लानिंग में हैं. 

ये भी पढ़ें-

Open-Source AI को सारे टेक लीडर कर रहे सपोर्ट, यह क्या होती है?



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *