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हत्या-चोरी को अंजाम देकर आरोपी नेपाल फरार, ऑपरेशन चला पुलिस ने किया गिरफ्तार


तेलंगाना पुलिस ने सेवानिवृत IPS अधिकारी विनय रंजय राय की 55 वर्षीय पत्नी तनुजा रंजन के हत्या मामले में करीब 6 महीने से फरार कई आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. सभी आरोपी घर में चोरी और महिला की हत्या को अंजाम देकर सीमा पार करके नेपाल पहुंच गए. जिनकी गिरफ्तारी के लिए तेंलगाना पुलिस ने नेपाल में सर्च ऑपरेशन चलाया और जाल बिछाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया.

हालांकि, पुलिस ने बताया कि उन्होंने भागने का एकदम सही प्लान बनाया था, लेकिन पुलिस ने उनसे भी ज्यादा चालाकी से जाल बिछाया. उन्होंने इसे किसी डकैती वाली फिल्म की तरह प्लान किया था.

आरोपियों ने कैसे दिया था वारदात को अंजाम?

पुलिस के मुताबिक, 7 मई की रात को तीन आदमी जुबली हिल्स के प्रशासन नगर में एक रिटायर्ड IPS अधिकारी के घर के पीछे बने अंधेरे पार्क में छिपे हुए थे. वे घंटों तक वहीं बैठे रहे और देखते रहे कि कैसे एक-एक करके हर मंजिल की लाइटें बंद हो रही हैं.

जांचकर्ताओं के अनुसार, एक रात पहले भी उन्होंने बिल्कुल ऐसा ही किया था, यानी पूरी रिहर्सल की थी. घर के अंदर उनकी साथी कल्पना, जो परिवार की भरोसेमंद नेपाली घरेलू सहायिका थी, सही मौके का इंतजार कर रही थी. रात करीब 2 बजे उसने कथित तौर पर इशारा किया. एक घंटे के भीतर रिटायर्ड IPS अधिकारी विनय रंजन राय की 55 वर्षीय पत्नी तनुजा रंजन की सोते समय दम घोंटकर हत्या कर दी गई.

महिला की हत्या करने के बाद 225 ग्राम सोना और नकदी ले उड़े थे आरोपी

पुलिस ने बताया कि जिस वक्त इस वारदात को अंजाम दिया गया, उस समय परिवार के बाकी सदस्य दो मंजिल ऊपर बेखबर सो रहे थे. हत्यारे लगभग 225 ग्राम सोना और कुछ नकदी लेकर भाग गए. वे उसी रास्ते से बाहर निकले जहां से आए थे, फिर एक ऑटो-रिक्शा लेकर नामपल्ली पहुंचे और नागपुर जाने वाली तेलंगाना एक्सप्रेस में सवार हो गए. अगली सुबह जब परिवार वालों को उनका शव मिला, तब तक हत्यारे सैकड़ों किलोमीटर दूर जा चुके थे.

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने क्या-क्या कदम उठाए?

जांचकर्ताओं ने बताया कि यह उनका पहला कदम था और गिरोह आगे बढ़ता रहा. पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाली, 7-8 लोगों के एक गिरोह की पहचान की और कई शहरों में उनकी तलाश शुरू कर दी. इसके बाद संदिग्धों ने कुछ ऐसा किया, जिससे वे लगभग पकड़ से बाहर हो गए. वे बिहार सीमा पार करके नेपाल चले गए, जहां भारतीय कानून का सीधा असर नहीं पहुंच सकता था. पुलिस ने जहां भी संभव हुआ, जवाबी कार्रवाई की. महाराष्ट्र में कल्पना के माता-पिता को हिरासत में लिया गया. मई में उसके साथियों, सुनील परियार और दिलीप विश्वकर्मा को भी गिरफ्तार किया गया और कुछ गहने भी बरामद हुए.

बाद में परियार पर PD एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया, लेकिन गिरोह का मास्टरमाइंड पुलिस की नजर से बचा रहा. यहां तक कि एक आरोपी इतना बेखौफ हो गया कि वह वापस भारत आ गया, दिल्ली में एक और डकैती में मदद की और फिर नेपाल भाग गया. इसलिए हैदराबाद पुलिस ने अपनी रणनीति बदली.

पुलिस की स्पेशल टीमें 5 महीने में तीन बार गईं नेपाल

जानकारी के मुताबिक, कमिश्नर वी. सी. सज्जनार और टास्क फोर्स के DCP वैभव गायकवाड़ के नेतृत्व में विशेष टीमों ने लगभग पांच महीनों के दौरान तीन बार नेपाल का दौरा किया. इस बार वे पुलिस की वर्दी में नहीं, बल्कि आम लोगों की तरह गए थे. बताया जाता है कि वे हेयर सैलून, सड़क किनारे के ढाबों और आभूषण की दुकानों के आसपास घूमते रहे, ऐसी जगहें जहां कोई भगोड़ा बाल कटवा सकता है, खाना खा सकता है या चुराया हुआ सोना बेचने की कोशिश कर सकता है.

उन्होंने वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से चुपचाप संपर्क बनाए और हर कदम पर नेपाल के कानूनों का पालन किया. वे बस एक गलती का इंतजार कर रहे थे और वह गलती उनके अपने ही घर से हुई. पुलिस को पता चला कि कल्पना का बेटा मुंबई जा रहा है. उन्होंने उसे पकड़ लिया और खबरों के अनुसार उसी के जरिए कल्पना को भी अपने पास बुला लिया.

आरोपियों को गिरफ्तार करके हैदराबाद लाया गया

वारदात को अंजाम देने के बाद शुरू हुई तलाश के करीब छह महीने के बाद सोमवार (26 अक्टूबर) को हैदराबाद पुलिस ने कल्पना समेत कम से कम चार आरोपियों की गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्हें हैदराबाद लाया गया और पूछताछ से पहले मेडिकल जांच के लिए उस्मानिया जनरल अस्पताल ले जाया गया. सज्जनार ने पहले ही दिन इसे मुनाफे के लिए की गई हत्या (मर्डर फॉर गेन) करार दिया था. अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मई की उस रात किसने क्या किया था. जो गिरोह कानून से बचने के लिए सीमा पार कर गया था, उसका खेल आखिरकार उसके अपने ही किसी करीबी की वजह से खत्म हो गया. 

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