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होर्मुज तो खुल गया, लेकिन जारी रहेगी US नाकेबंदी, ट्रंप के बयान से मची हलचल, क्या भारतीय जहाजों पर पड़ेगा असर?


मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कॉमर्शियल शिप के लिए पूरी तरह खुला घोषित किया गया है. हालांकि, अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा. ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अरागची ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम के बाद सभी कॉमर्शियल शिप के लिए यह अहम जलमार्ग पूरी तरह खोल दिया गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि युद्धविराम की अवधि के दौरान तय मार्गों पर जहाजों की आवाजाही की अनुमति होगी.

ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी: डोनाल्ड ट्रंप

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने के बाद वैश्विक बाजारों में तुरंत असर देखने को मिला. तेल की कीमतों में गिरावट आई और शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अधिक सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा, ‘हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला है, लेकिन ईरान से जुड़े मामलों में हमारी नौसैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक हमारे सभी समझौते पूरी तरह पूरे नहीं हो जाते.’

10,000 से अधिक सैनिक और कई विमान तैनात

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस नाकेबंदी अभियान में 10,000 से अधिक सैनिक, एक दर्जन से ज्यादा जहाज और कई विमान शामिल हैं, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज का खुलना सीमित दायरे में हो सकता है, क्योंकि जहाजों की आवाजाही समन्वित रास्तों के जरिए और ईरान के तट के करीब रखी जा रही है, जिससे नियंत्रण बना रहता है. यह पूरा घटनाक्रम इजरायल-लेबनान सीजफायर के बीच सामने आया है, जो फिलहाल लागू है, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं.

ट्रंप ने जल्द बातचीत होने के दिए संकेत

इस बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ जल्द बातचीत हो सकती है और अंतिम समझौते की स्थिति में वह पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर डालता है.

वर्तमान संकट ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े व्यापक तनाव के कारण शुरू हुआ था, जिससे जहाजों पर हमले और तेल परिवहन में कमी देखी गई. फिलहाल युद्धविराम और आंशिक खुलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है.

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Input By : आईएएनएस



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