Headlines

10,314 करोड़ रुपये के घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, SAGA ग्रुप के करीबी रवि शंकर तिवारी गिरफ्तार


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • रवि तिवारी ने अवैध धन से कई संपत्तियां खरीदीं थीं।

देशभर के 30 लाख से ज्यादा निवेशकों के साथ कथित तौर पर 10,314 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है. ED ने आरोपी रवि शंकर तिवारी को मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को PMLA के तहत गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के अगले दिन बुधवार (15 जुलाई, 2026) को उसे दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है.

ED के मुताबिक, ये मामला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC), लस्टीनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (LJCC), ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज कई FIR से जुड़ा है. उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ समेत देश के कई राज्यों में इन संस्थाओं के खिलाफ मामले दर्ज हैं.

ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

जांच में सामने आया कि इन संस्थाओं ने लोगों को जमा योजनाओं में निवेश करने पर भारी मुनाफे का लालच दिया. लाखों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई इन योजनाओं में जमा कर दी, लेकिन बाद में निवेश की रकम का कथित तौर पर गबन कर लिया गया. ED के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में देशभर के करीब 30.51 लाख निवेशकों से लगभग 10,314 करोड़ रुपये की ठगी की गई. ये नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था.

जांच में यह भी पता चला कि रवि शंकर तिवारी साल 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले SAGA ग्रुप से जुड़ा हुआ था. वो समूह में वरिष्ठ पद पर काम करता था और एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, LUCC सहित SAGA ग्रुप की कई कंपनियों में टीम लीडर की भूमिका निभा रहा था. 

ईडी के सवालों का आरोपी ने नहीं दिया सही जवाब

जांच एजेंसी का दावा है कि रवि तिवारी ने विदेश में मौजूद समीर अग्रवाल की मदद से LUCC और LJCC के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई. PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयान और अन्य जांच के दौरान ईडी को रवि तिवारी की भूमिका से जुड़े कई अहम सुराग मिले. जांच में ये भी सामने आया कि SAGA ग्रुप की विभिन्न कंपनियों से रवि तिवारी और उसके परिवार के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा कराई गई थी. जब ईडी ने इन पैसों के स्रोत के बारे में पूछा तो रवि तिवारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका.

आरोपी ने अपने और अपने परिजनों के नाम कई संपत्तियां खरीदीं

ईडी के मुताबिक, रवि तिवारी का कई कंपनियों में हित था. इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग खातों में भेजने, घुमाने और निकालने के लिए किया गया. जांच में ये भी पता चला कि रवि तिवारी ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर कई आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां खरीदीं, जिनके लिए कथित तौर पर घोटाले से हासिल धन का इस्तेमाल किया गया.

इस मामले में ED पहले ही कई अचल संपत्तियां जब्त कर चुकी है. एजेंसी अब रवि तिवारी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है. ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है. 

यह भी पढ़ेंः ED Action: ED का बड़ा एक्शन! दिल्ली से बंगाल तक 5 राज्यों में 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड, विदेशी फंडिंग नेटवर्क की जांच तेज



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *