कश्मीर के किसानों के लिए ये साल अच्छे लेकर नहीं आया है, खासकर सेब के किसानों के लिए ये साल बुरा साबित होने वाला है. पहले मौसम की मार और अब पेट्रोल-डीजल के बड़े दामो के चलते उत्पादन लागत में बढोत्तरी ने किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है. मई महीने मे पहले उत्तरी, दक्षिण और मध्य कश्मीर के कई इलाको में जबरदस्त ओलावृष्टि से सेब के बागो को 75-90 प्रतिशत तक नुक्सान हुआ है. बारामूला, कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग जिलो में सेब बगानों को काफी नुकसान पहुंचा है.
दरअसल, ईरान जंग के कारण पेट्रोल-डीजल के दामों हो रही बढ़ोत्तरी ने किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है. कश्मीर में अगले कुछ दिनों में धान की खेती शुरू होनी है लेकिन सेब के बागो में दवाई का सीजन पहले से ही शुरू है. हर तरफ लोग डीजल से चलने वाले छोटे ट्रैक्टर और पेट्रोल से चलने वाले स्प्रेयर के साथ काम करते दिख रहे हैं.
पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों ने घटाया किसानों का मुनाफा
इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के बड़े दामों ने किसानों का मुनाफा कम कर दिया है. अनंतनाग के साहब के किसान अब्दुल हमीद के मुताबिक, ‘डीजल-पेट्रोल का इस्तेमाल हर काम में होता है, यहां तक कि पेड़ को बीमारी से बचाने के लिए भी डीजल का चिड़काव किया जाता है.
किसान अब्दुल हमीद ने यह भी कहा है कि “पिछले कई सालो से बागवानी पहले ही परेशानी में है. रेट कम मिल रहे हैं. एक तरफ दवाओं के दाम बड़े हैं तो दूसरी तरफ अब डीजल के दाम बड़े हैं. सरकार को इस बदलाव को वापस लेना चाहिए.” किसान ने यह भी कहा कि “नई हाइब्रिड वैरायटी के सेब के बागो के लिए तो खर्चा और ज्यादा हो गया है….क्योंकि इनमें ड्रिप सिंचाई और पानी पंप का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, जिसका खर्चा बढ़ गया है.”
डीजल के दाम बढ़ने से बढ़ा अतिरिक्त भार
एक युवा और छोटे किसान साहिल के अनुसार, जहां एक साल में उसके बाग में 20 हजार का डीजल इस्तेमाल होता था, वहीं अब उसको 30 हजार का खर्चा होगा क्योंकि उसके बाग में सब कुछ मशीनीकृत है. किसान ने बताया कि अभी सेब पूरे लगे भी नहीं है और किसानों को फसल के तैयार होने और बाजार में अच्छे दामो के ना मिलने की चिंता सताने लगी है. किसान ने कहा कि खर्चे बढ़ेंगे और दाम वहीं मिलेंगे तो किसान कहा जाएगा.
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