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Sawan 2026: सावन में महाकाल, केदारनाथ और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का क्या फल मिलता है ?


सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है. सावन में छोटे से बड़े हर शिव मंदिर में शिव जी के दर्शन और पूजन के लिए लंबी कतार लगती है. इतना ही नहीं सावन में 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ आम दिनों के मुकाबले ज्यादा नजर आती है.

स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार सावन शिव को अति प्रिय है. इस समय 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने वाले साधक ग्रहों की अशुभता से मुक्ति पाता है, मोक्ष प्राप्ति के रास्ते खुल जाते हैं, ऐसी मान्यता है.

स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार सावन शिव को अति प्रिय है. इस समय 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने वाले साधक ग्रहों की अशुभता से मुक्ति पाता है, मोक्ष प्राप्ति के रास्ते खुल जाते हैं, ऐसी मान्यता है.

किसी कारणवश अगर आप सावन में ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं तो घर में शिव जी का अभिषेक कर द्वादश ज्योतिर्लिंग का पाठ करें. मान्यता है इससे लंबी आयु, आरोग्य, सफलता, वैवाहिक जीवन में सुख, संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

किसी कारणवश अगर आप सावन में ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं तो घर में शिव जी का अभिषेक कर द्वादश ज्योतिर्लिंग का पाठ करें. मान्यता है इससे लंबी आयु, आरोग्य, सफलता, वैवाहिक जीवन में सुख, संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

आदि शंकराचार्य ने द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में कहा है - द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वसिद्धिफलं लभेत्॥. इसका मतलब है जो व्यक्ति रोजाना सुबह 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण या नामों का पाठ करता है, वह पापों से मुक्त होकर सभी सिद्धियों और शुभ फलों को प्राप्त करता है. सावन में इस स्तोत्र का पाठ करना दोगुना फल देता है.

आदि शंकराचार्य ने द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में कहा है – द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वसिद्धिफलं लभेत्॥. इसका मतलब है जो व्यक्ति रोजाना सुबह 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण या नामों का पाठ करता है, वह पापों से मुक्त होकर सभी सिद्धियों और शुभ फलों को प्राप्त करता है. सावन में इस स्तोत्र का पाठ करना दोगुना फल देता है.

ये हैं 12 ज्योतिर्लिंग - सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर (ममलेश्वर), केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर.

ये हैं 12 ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर (ममलेश्वर), केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर.

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव अनंत अग्निस्तंभ (ज्योति) के रूप में प्रकट हुए. उन्होंने भक्तों के कल्याण के लिए पृथ्वी पर 12 स्थानों पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में स्वयं प्रकट होकर निवास किया,

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव अनंत अग्निस्तंभ (ज्योति) के रूप में प्रकट हुए. उन्होंने भक्तों के कल्याण के लिए पृथ्वी पर 12 स्थानों पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में स्वयं प्रकट होकर निवास किया,

Published at : 29 Jul 2026 11:17 AM (IST)

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