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“सर, अब क्या करना है?” पूछना पड़ा भारी, CEO ने सीनियर कर्मचारी को नौकरी से निकाला


भारत के स्टार्टअप जगत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने नौकरी, लीडरशिप और “ओनरशिप” को लेकर नई बहस छेड़ दी है. InstaAstro के फाउंडर और CEO Nitin Verma ने खुद खुलासा किया कि उन्होंने एक सीनियर कर्मचारी को सिर्फ इसलिए नौकरी से निकाल दिया क्योंकि उसने उनसे पूछा था..“सर, अब आगे क्या करना है?”. यह घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं.

‘मैंने उसे नौकरी से निकाल दिया’

नितिन वर्मा ने एक LinkedIn पोस्ट में लिखा कि उन्होंने उस कर्मचारी को खास तौर पर इसलिए हायर किया था ताकि उन्हें उस काम के बारे में सोचना न पड़े. लेकिन जब वही सीनियर कर्मचारी बार-बार उनसे गाइडेंस मांगने लगा, तो उन्हें लगा कि उसमें “ओनरशिप” की कमी है. वर्मा ने बताया कि जब कर्मचारी ने कहा “सर, आप बेहतर जानते हैं”, तो उन्होंने जवाब दिया “फिर मैंने आपको क्यों रखा?”. इसके बाद बातचीत खामोशी में खत्म हो गई और उन्होंने उसे हटा दिया.

ओनरशिप को लेकर CEO की सोच

इस घटना के बाद नितिन वर्मा ने अपनी मैनेजमेंट फिलॉसफी भी शेयर की. उनका कहना है कि “ओनरशिप” सिखाई नहीं जा सकती, यह इंसान के अंदर पहले से होनी चाहिए. उनके मुताबिक, अगर किसी को पूरी आजादी दे दी जाए लेकिन वह खुद से पहल न करे, तो वह आजादी भी कन्फ्यूजन बन जाती है. उन्होंने साफ कहा “फ्रीडम बिना ओनरशिप के सिर्फ कन्फ्यूजन है”.

सीनियर प्रोफेशनल्स के लिए क्या संदेश?

वर्मा ने खास तौर पर सीनियर लेवल के कर्मचारियों को लेकर कहा कि उनकी जिम्मेदारी होती है कि वे हर दिन खुद तय करें कि क्या करना है. उनका मानना है कि सीनियरिटी का मतलब सिर्फ अनुभव नहीं, बल्कि खुद से निर्णय लेने की क्षमता भी है. उन्होंने कहा कि वह ऐसी टीम के साथ कंपनी नहीं बना सकते जिन्हें हर बात के लिए बताया जाए कि क्या सोचना है और क्या करना है.

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सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है. कुछ लोग CEO के फैसले को सही ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि सीनियर पद पर बैठे लोगों में खुद से काम करने की क्षमता होनी चाहिए. वहीं कई यूजर्स इसे “टॉक्सिक वर्क कल्चर” बता रहे हैं और कह रहे हैं कि गाइडेंस मांगना कोई गलत बात नहीं है. कुल मिलाकर, यह मामला अब एक बड़े सवाल में बदल गया है—क्या आज के वर्कप्लेस में ओनरशिप ज्यादा जरूरी है या टीमवर्क और गाइडेंस?

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