Headlines

Explained: बकरीद से पहले तनाव क्यों? मुंबई में चाकूबाजी, जयपुर में जुबान काटने की धमकी और UP में सख्त पाबंदियों समेत कहां क्या बवाल


देश में इस बार बकरीद का त्योहार आने से पहले ही तीन राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में माहौल गरमा गया है. कहीं बकरों को लेकर हाउसिंग सोसायटी में खूनी झड़प हुई तो कहीं नेताओं के बयानों से आग भड़की. वहीं, यूपी सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त पाबंदियां लगा दी हैं. इसके अलावा कई राज्यों में बकरीद को लेकर माहौल गर्मा गया. आइए, इन राज्यों के मसले को तफसील से समझते हैं…

महाराष्ट्र: मीरा रोड की सोसायटी में बकरों को लेकर खूनी संघर्ष

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड इलाके में स्थित पूनम क्लस्टर-1 हाउसिंग सोसायटी में बकरीद की कुर्बानी को लेकर सोमवार की रात जमकर बवाल हुआ. यह विवाद इतना बढ़ा कि चाकू चल गए, हनुमान चालीसा का पाठ हुआ, एक सूअर का बच्चा लाकर विरोध जताया गया और आखिर में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा.

इस सोसायटी में 550 से ज्यादा फ्लैट हैं, जिनमें कई मुस्लिम परिवार रहते हैं. पिछले कुछ सालों से यहां मुस्लिम परिवार बकरीद के लिए कुर्बानी के बकरे लाते रहे हैं और सोसायटी परिसर में अस्थायी शेड बनाकर उन्हें बांधते हैं. इंडियन एक्सप्रेस को एक स्थानीय निवासी ने बताया, ‘सोसायटी में ऐसा काफी सालों से हो रहा है. बकरे बांधे जाते हैं और कुर्बानी भी की जाती है, लेकिन कुछ लोगों को इससे दिक्कत रही है और पिछली बार भी ऐसा ही मसला हुआ था. इस बार हालात ज्यादा बिगड़ गए.’

सोमवार रात करीब 10 बजे कुछ निवासियों ने बजरंग दल के स्थानीय नेता पवन ठाकुर और दूसरे कार्यकर्ताओं को सोसायटी में दखल देने के लिए बुला लिया. करीब दो घंटे बाद, बजरंग दल के पदाधिकारी नागनाथ कांबले भी समर्थकों के साथ पहुंच गए. रात करीब 12:50 बजे, एक अज्ञात शख्स ने कथित तौर पर पीछे से नागनाथ कांबले पर चाकू से हमला करने की कोशिश की. हर्ष सिंह की शिकायत पर काशिमीरा पुलिस स्टेशन में अज्ञात हमलावर के खिलाफ FIR दर्ज की. विरोध के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर एक सूअर का बच्चा भी सोसायटी परिसर में लाने की कोशिश की, और इसे ‘वराह पूजा’ का नाम दिया. बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सूअर को जब्त कर लिया और स्थिति को काबू में किया.

बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने कहा, ‘बोरीवली के सुमेर हाइट्स में एक मुस्लिम परिवार रहता है, लेकिन वो छह बकरे लेकर आया. पूरी सोसायटी उसके खिलाफ है. मीरा रोड में भी ऐसा ही हो रहा है. अगर अल्पसंख्यक समुदाय संविधान नहीं मानता और शरिया मानता है, तो हम बकरों का जवाब सूअरों से देंगे.’ उपायुक्त राहुल चव्हाण ने बताया कि दोनों पक्षों के साथ बैठक के बाद सभी 51 बकरों को नगर निगम की गाड़ियों में भरकर सोसायटी से बाहर निकाल दिया गया.

राजस्थान: बीजेपी विधायक की ‘जुबान काटने’ की धमकी

राजस्थान में बकरीद से पहले बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य का एक बयान सियासी तूफान खड़ा कर गया. जयपुर की हवामहल सीट से विधायक आचार्य ने पश्चिम बंगाल के टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर को धमकी देते हुए कहा कि अगर उन्होंने गाय या ऊंट की कुर्बानी की बात की तो ‘उनकी जुबान काट दी जाएगी.’

आचार्य ने यह भी कहा, ‘मेरी मुस्लिम समुदाय को सलाह है कि वो बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी देने के बजाय केक काटकर जश्न मनाएं. हर जानवर का भी परिवार होता है और जीने का हक है.’ अपनी धमकी भरी भाषा पर बचाव करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर हुमायूं कबीर का गाय पर बयान सही है, तो मेरी जुबान काटने की धमकी भी गलत नहीं है.’

यह पहली बार नहीं है जब बालमुकुंद आचार्य किसी विवाद में घिरे हों. फरवरी 2026 में उन्होंने राजस्थान विधानसभा में गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई थी, जिसके बाद सदन सात बार स्थगित हुआ था.

उत्तर प्रदेश: योगी सरकार की सख्त पाबंदियां और मलीहाबाद में तनाव

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बकरीद से पहले सख्त निर्देश जारी किए हैं. सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक लगा दी है और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर भी पाबंदी लगाई गई है. साथ ही, नमाज सिर्फ पारंपरिक और निर्धारित स्थानों पर ही पढ़ने का आदेश दिया गया है. सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होगी. इसके अलावा, अवैध स्लॉटरहाउस के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं.

सरकार ने संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है. सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है.

लखनऊ के मलीहाबाद इलाके में भी बकरीद से पहले तनाव की स्थिति बनी हुई है. हिंदू संगठनों ने एक विवादित स्थल पर हनुमान चालीसा पाठ का विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस को वहां भी बड़ी संख्या में बल तैनात करना पड़ा. महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है, जबकि राजस्थान में नेताओं के विवादित बयानों के बीच प्रशासन चौकस है.

सिर्फ महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई और राज्यों में भी बकरीद से पहले ही तनाव और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी.

पश्चिम बंगाल: गाय की कुर्बानी पर रोक का विवाद

पश्चिम बंगाल में भी बकरीद से पहले सियासी पारा चढ़ गया. राज्य सरकार ने 1950 के पशु वध नियंत्रण कानून को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए. इसके तहत, बिना सरकारी पशु चिकित्सक की अनुमति के गाय या भैंस की कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी. कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी साफ कर दिया कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

कर्नाटक: हासन में किसानों का प्रदर्शन और विवादित बैनर

कर्नाटक के हासन जिले में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई. यहां स्थानीय मुस्लिम संगठनों ने बकरीद के लिए पशु खरीदने का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया. इस फैसले से पशुपालकों और डेयरी किसानों में गुस्सा फैल गया. साप्ताहिक पशु मेले में खरीदार न आने से नाराज सैकड़ों किसानों ने प्रदर्शन किया और अपने मवेशियों को लेकर सीधे डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर पहुंचने की धमकी दी.

मुस्लिम संगठनों के इस फैसले के पीछे की वजह भी चौंकाने वाली थी. उनके प्रतिनिधि अंशद-ए-पाल्या ने बताया कि कई मुस्लिम बहुल इलाकों में डराने वाले पोस्टर लगाए गए, जिनमें पशु खरीदने पर घर और जमीन जब्त करने की धमकी दी गई थी. पुलिस और प्रशासन ने ऐसे किसी भी पोस्टर को लगाने से इनकार किया. हासन शहर में लगे बैनरों में पशु वध करने पर ‘सभी संपत्तियों की स्थायी जब्ती’ की चेतावनी दी गई थी.

तेलंगाना: राज्यपाल से विहिप की शिकायत और बीजेपी का प्रदर्शन

तेलंगाना में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से मुलाकात कर गायों के अवैध वध को रोकने की मांग की. VHP ने आरोप लगाया कि बकरीद से पहले राज्य में बड़े पैमाने पर गायों का अवैध परिवहन हो रहा है और पुलिस कथित तौर पर MIM नेताओं के दबाव में असहाय है. राज्यपाल ने VHP को उनके संवैधानिक दायरे में कार्रवाई का भरोसा दिया.

वहीं, तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने गौ रक्षकों की गिरफ्तारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. बीजेपी ने चेतावनी दी कि अगर गौ रक्षकों को नहीं छोड़ा गया तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

दिल्ली: सख्त गाइडलाइंस पर विपक्ष का हमला

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीजेपी सरकार ने भी बकरीद के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं. मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि प्रतिबंधित पशुओं गाय, बछड़े और ऊंट की कुर्बानी पूरी तरह गैरकानूनी होगी. पशुओं की खरीद-बिक्री सार्वजनिक जगहों पर नहीं हो सकती और कुर्बानी सिर्फ रजिस्टर्ड जगहों पर ही दी जा सकेगी.

इन गाइडलाइंस पर विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ‘ये सब माहौल खराब करने और नफरत फैलाने के लिए किया जा रहा है. हर राज्य में पहले से ही कानून मौजूद हैं. दिल्ली में आखिर कौन से ऊंट और गाय की कुर्बानी होती है?’ समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर एक धार्मिक समिति बनाने की मांग करते हुए कहा कि एकतरफा फैसले से समस्याएं ही पैदा होती हैं.

मध्य प्रदेश और झारखंड: प्रशासन पूरी तरह अलर्ट

मध्य प्रदेश के कुशीनगर जिले में भी प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए. जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने शांति समिति की बैठक बुलाकर धार्मिक नेताओं से सहयोग की अपील की. वहीं, झारखंड के DGP तदाशा मिश्रा ने सभी 24 जिलों के पुलिस अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया, खासकर उन जिलों में जहां पहले सांप्रदायिक घटनाएं हो चुकी हैं.

आखिर बकरीद के त्योहार पर इतना बवाल क्यों?

इस बवाल की 4 बड़ी वजहें हैं:

  • गाय वध पर कानूनी रोक और त्योहार का टकराव: देश के ज्यादातर राज्यों में गाय और दूसरे दुधारू पशुओं के वध पर पहले से ही कानूनी पाबंदी है और इन कानूनों को लेकर बकरीद के दौरान हर साल संवेदनशीलता बढ़ जाती है. इस बार यह मामला सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट तक पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर गो-हत्या विरोधी कानूनों के कड़ाई से पालन की मांग की गई, हालांकि अदालत ने त्योहार से ठीक पहले इस पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया.
  • प्रशासनिक सख्ती और उस पर सियासत: कई राज्य सरकारों ने बकरीद को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सड़कों पर नमाज और सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी पर रोक लगा दी. दिल्ली सरकार ने भी गाय, बछड़े और ऊंट की कुर्बानी को गैर-कानूनी घोषित कर दिया. इन आदेशों पर विपक्षी दलों ने सरकार पर ‘सांप्रदायिक नफरत फैलाने’ का आरोप लगाया. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाया, ‘दिल्ली में आखिर कौन से ऊंट और गाय की कुर्बानी होती है?’ इसके साथ ही, कर्नाटक के हासन में लगाए गए विवादित बैनर में पशु वध करने पर ‘संपत्ति जब्त करने’ की चेतावनी दी गई थी. इसने माहौल को और गर्मा दिया.
  • दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की सक्रियता और प्रदर्शन: मुंबई के मीरा रोड इलाके की एक हाउसिंग सोसायटी में बकरों को रखे जाने के विरोध में VHP और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और सोसायटी परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया. एक अन्य विवाद में इन्हीं संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सोसायटी में एक सूअर का बच्चा लाने की कोशिश की और इसे ‘वराह पूजा’ का नाम दिया, जिससे मामला और बिगड़ गया. वहीं, कर्नाटक के हासन जिले में स्थानीय मुस्लिम संगठनों ने पशु खरीदने का बहिष्कार करने का ऐलान किया, जिससे पशुपालकों और डेयरी किसानों में भारी रोष फैल गया और उन्होंने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया.
  • नेताओं के भड़काऊ बयानों से घावों पर नमक: विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बयानों ने आग में घी का काम किया. पश्चिम बंगाल में TMC विधायक हुमायूं कबीर ने कहा, ‘हर हाल में कुर्बानी होगी’, जबकि राजस्थान के बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कबीर की ‘जुबान काटने’ की धमकी दी और मुसलमानों को ‘केक काटकर’ जश्न मनाने की सलाह दी. महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने ‘बकरों का जवाब सूअरों से देने’ की बात कही. इन भड़काऊ बयानों और आक्रामक प्रदर्शनों ने आम नागरिकों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया, क्योंकि कुर्बानी का धार्मिक अधिकार अब सीधे कानूनों, प्रशासनिक सख्ती और सियासी बयानबाजी के बीच घिरता दिख रहा है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *