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Eid Al Adha: दिल्ली में सुरक्षा के बीच अकीदत के साथ मनाई जा रही बकरीद, जान लें कुर्बानी के नियम


आज दिल्ली में सुबह से ही ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. लोग एक-दूसरे को बकरीद की मुबारकबाद दे रहे हैं. सुबह से ही दिल्ली के जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और विभिन्न ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है. इससे जुड़े कई वीडियो भी सामने आये हैं. आज मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर परिवार और बच्चों के साथ मस्जिदों और ईदगाहों में पहुंच रहे हैं.  

इस दौरान दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के सख्त इंतजाम देखने को मिला ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके. ईद-उल-अजहा को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती, फ्लैग मार्च, दंगा-रोधी वाहन की व्यवस्था की गई है और सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ा दी है.

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दिल्ली के सुरक्षा व्यवस्था के सख्त इंतजाम

राजधानी में बुधवार रात से ही लगभग 1,100 पुलिस कर्मियों के साथ 23 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है. सुबह पांच बजे से ही सभी प्रमुख नमाज स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस तैनात की गई, जिनमें मंदिरों के आसपास के क्षेत्र भी शामिल हैं ताकि त्योहार शांति से संपन्न हो सके.

पुलिस उपायुक्त (उत्तर-पूर्वी) राहुल अलवाल ने बुधवार को बताया था कि किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कई पिकेट पॉइंट, त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की पहचान की है और गश्त तेज कर दी है. उन्होंने कहा था कि हम ये सुनिश्चित करेंगे कि खुले में किसी भी प्रकार की बलि न दी जाए और पशु अवशेष सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर न फेंका जाए. दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

क्या है कुर्बानी का समय?

आज सुबह की नमाज के बाद से कुर्बानी शुरू हो जाएगी. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, नमाज से पहले दी गई कुर्बानी का कोई मान्य नहीं होता है इसलिए सुबह होते ही लोग मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने पहुंचने लगते हैं.  इस्लामी जानकारों की मानें तो ईद-उल-अजहा की कुर्बानी सिर्फ ‘अय्याम-ए-नहर’ यानी निर्धारित दिनों में ही होती है. इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने का नाम जिलहिज्ज (Dhul-Hijjah) है और कुर्बानी इसी महीने की 10, 11 और 12 तारीख दी जाती है.

कुर्बानी का समय 10 जिलहिज्ज की ईद की नमाज के बाद शुरू होता है और 12 जिलहिज्ज को सूरज डूबने तक रहता है. पहले दिन को 10 जिलहिज्ज (ईद-उल-अजहा का दिन), दूसरे दिन को 11 जिलहिज्ज और तीसरे दिन को 12 जिलहिज्ज कहा जाता है. इस तरह कुर्बानी तीसरे दिन (12 जिलहिज्ज) शाम तक चलती है. 

 अनीश अब्बासी ने लोगों से की अपील

इस बीच दिल्ली बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनीश अब्बासी ने देशवासियों, खासकर मुस्लिम समाज से शांति, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की है. अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ट्वीट कर उन्होंने ये अपील की और कहा, “इस पाक त्योहार को प्रेम, भाईचारे, साफ-सफाई और जिम्मेदारी के साथ मनाएं.  कुर्बानी के दौरान विशेष ध्यान रखें कि खून नालियों या सार्वजनिक स्थानों पर न बहाया जाए तथा कुर्बानी के अवशेष इधर-उधर न फैलाएं. हम सबकी जिम्मेदारी है कि अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें. किसी को असुविधा न हो और हमारा त्योहार अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दे.”

क्यों दी जाती है बकरी ईद पर कुर्बानी?

उन्होंने लोगों से अपील की कि कुर्बानी के अवशेषों का उचित निस्तारण किया जाए और आसपास स्वच्छता बनाए रखी जाए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे. भारत विविधताओं वाला देश है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के त्योहार प्रेम, सम्मान और भाईचारे के साथ मनाए जाते हैं. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ईद-उल-अजहा के अवसर पर अमन और सौहार्द की मिसाल पेश करें तथा देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को और मजबूत बनाएं.





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