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राजस्थान: कोटा की बिजली व्यवस्था पर फूटा ऊर्जा मंत्री का गुस्सा, KEDL अधिकारियों को लगाई फटकार


कोटा में लगातार बिजली ट्रिपिंग, घंटों तक फॉल्ट और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में हो रही देरी को लेकर राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर का गुस्सा शनिवार को खुलकर सामने आया है. मंत्री ने कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिक्ट लिमिटेड (KEDL) के शीर्ष अधिकारियों को अपने आवास पर तलब कर बिजली व्यवस्था की बदहाली पर जमकर फटकार लगाई.

बैठक में KEDL के सीईओ मनीष अरोड़ा और टेक्निकल हेड वेंकटेशन कोड़ी से सीधे सवाल पूछते हुए मंत्री नागर ने कहा कि कोटा शहर की बिजली व्यवस्था लगातार चरमरा रही है, जबकि जनता परेशान होकर शिकायतें दर्ज करा रही है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि अगले दो महीनों में हालात नहीं सुधरे तो सरकार को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे.

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जनता की सुनवाई नहीं, अधिकारियों से संपर्क तक मुश्किल

ऊर्जा मंत्री ने KEDL के प्रशासनिक ढांचे को भी निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के अधिकारी जनता से दूरी बनाकर रखते हैं और उपभोक्ताओं की समस्याओं की सुनवाई नहीं होती. मंत्री ने कहा कि लोगों को कार्यालयों में डराने-धमकाने का माहौल नहीं बल्कि समाधान देने की व्यवस्था चाहिए. उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए जाएं और कंपनी का ढांचा जयपुर डिस्कॉम की तर्ज पर जवाबदेह बनाया जाए.

फॉल्ट सुधारने में देरी पर जताई नाराजगी

मंत्री नागर ने कहा कि फॉल्ट रिपेयर टीम (FRT) में कर्मचारियों और संसाधनों की भारी कमी है, जिसके कारण बिजली गुल होने के बाद आपूर्ति बहाल करने में लंबा समय लग रहा है. उन्होंने आधुनिक उपकरण और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.

ग्रामीण क्षेत्रों से भी पीछे छूटा शहर

बैठक में मंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बिजली प्रबंधन शहर से बेहतर दिखाई दे रहा है. जहां गांवों में नए जीएसएस बन रहे हैं और तूफान के बाद तेजी से बिजली बहाल की जाती है, वहीं कोटा शहर में मामूली फॉल्ट पर भी घंटों ब्लैकआउट की स्थिति बन जाती है.

250 करोड़ की अंडरग्राउंड लाइन पर भी सवाल

ऊर्जा मंत्री ने अंडरग्राउंड बिजली लाइन परियोजना पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पहले करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. अब समय आ गया है कि KEDL पुरानी कार्यप्रणाली छोड़कर एआई आधारित और आधुनिक तकनीकों को अपनाए.

भ्रष्टाचार के संकेत, मांगी रोजाना रिपोर्ट

बैठक में सतर्कता जांच रिपोर्ट (VCR) और कथित सेटलमेंट मामलों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए. मंत्री ने इसे संभावित अनियमितताओं का मामला बताते हुए ट्रिपिंग, फॉल्ट, शटडाउन और जले ट्रांसफार्मरों की रोजाना रिपोर्ट सरकार को भेजने के आदेश दिए. कोटा की बिजली व्यवस्था को लेकर पहली बार ऊर्जा मंत्री ने इतने सख्त तेवर दिखाए हैं. अब निगाहें इस बात पर हैं कि KEDL अगले दो महीनों में हालात सुधार पाता है या नहीं.

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