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बांग्लादेश में तारिक रहमान को बड़ा झटका, सरकार बनने के तीन महीने बाद ही एकमात्र बौद्ध मंत्री ने दिया इस्तीफा


बांग्लादेश में इस साल फरवरी में हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की शानदार जीत हुई थी. इन चुनावों में चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की थी, जिसके बाद तारिक रहमान सरकार में दो को मंत्री भी बनाया गया. निताई रॉय चौधरी, जोकि हिंदू हैं. दूसरे दीपेन दीवान चकमा, जोकि बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं. सरकार बनने के करीब तीन महीने बाद दीपेन दीवान चकमा ने चटगांव हिल ट्रैक्ट्स अफेयर्स के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपनी शारीरिक परेशानियों का हवाला देते हुए पद छोड़ा है. 

दीपेन के समर्थकों का दावा है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से नहीं, दबाव के कारण सिर्फ तीन महीने के कार्यकाल में इस्तीफा दिया है. बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार के अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान को लिखे इस्तीफे में दीपेन ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं हो रही थीं, जिससे उन्हें अपना काम करने में मुश्किलें आ रही थीं. इस्तीफे की चिट्ठी में दीपेन ने लिखा कि सरकार के विकास और सरकारी कामों की रफ्तार बनाए रखने में मदद के लिए पद से हटना जरूरी था. 

2005 में नौकरी से दिया था इस्तीफा

चिट्ठी में कहा गया, मेरी शारीरिक बीमारी की वजह से, मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाने में कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं. करीब साढ़े तीन महीने पहले दीपेन दीवान ने इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. दीवान इससे पहले वरिष्ठ संयुक्त जिला जज थे और उन्होंने 2005 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद वो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए थे.

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जियाउर रहमान के सलाहकार थे दीवान के पिता 

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, उनके पिता सुबिमल दीवान, बीएनपी के फाउंडर और पूर्व अध्यक्ष जियाउर रहमान के सलाहकार थे. सुबिमल रंगमती जिला बीएनपी के फाउंडिंग जनरल सेक्रेटरी भी थे. 2010 में दीवान रंगमती में बीएनपी के अध्यक्ष चुने गए. 2016 में उन्हें पार्टी का सेंट्रल असिस्टेंट रिलीजियस अफेयर्स सेक्रेटरी बनाया गया. हालांकि इस पद की जिम्मेदारी दीवान अब भी संभाल रहे हैं. उन्होंने 12 फरवरी को पहली बार चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने यूपीडीएफ के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार पहल चकमा को 169,066 वोटों से हराया. 17 फरवरी को बीएनपी के भारी मतों से चुनाव जीतने और तारिक रहमान की लीडरशिप में सरकार बनाने के बाद, दीवान को चटगांव पहाड़ी क्षेत्र मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई.

दीवान के इस्तीफे पर बांग्लादेश में बहस

बांग्लादेशी मीडिया प्रोथोम आलो के अनुसार, बीएनपी की राजनीति में शामिल नेता और कार्यकर्ता, साथ ही पहाड़ी समुदाय के लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि दीपेन दीवान ने ऐसा फैसला क्यों किया. दीपेन के इस्तीफे के पीछे की असली वजह को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. उनके समर्थकों ने रंगमती में सड़क जाम कर दिया और उनका इस्तीफा वापस लेने और उन्हें फिर से बहाल करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि दीपेन दीवान को दबाव के कारण इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. स्थानीय बीएनपी नेताओं ने कहा कि उन्हें दीपेन दीवान के इस्तीफे का अंदाजा नहीं था. उनका मानना ​​है कि उन्होंने मंत्रालय चलाने, रंगमती राजनीति को नियंत्रित करने और चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में जिला परिषद में सरकारी नियुक्ति करने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की वजह से इस्तीफा दिया होगा. चटगांव पहाड़ी क्षेत्र के मामलों के मंत्रालय की गतिविधियां तीन पहाड़ी जिलों पर केंद्रित हैं. वहां तीन पार्लियामेंट्री सीटें हैं. राष्ट्रीय चुनाव में बीएनपी उम्मीदवारों ने रंगमती, खगराछारी और बंदरबन तीनों सीटें जीतीं.  

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