इंद्रप्रस्थ में बैठे अर्जुन ने श्रीकृष्ण से ऐसा सभा भवन बनाने का अनुरोध किया, जो अद्भुत और अनुपम हो. श्रीकृष्ण ने उनकी भावना को समझा और युधिष्ठिर से अनुमति लेने की सलाह दी. यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और पांडवों के गौरव का प्रतीक बनने वाला था.

श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से सभा भवन निर्माण की बात कही. युधिष्ठिर ने प्रसन्न होकर अनुमति दी. इसके बाद विश्वकर्मा ने शुभ मुहूर्त में दिव्य सभा के निर्माण का कार्य आरंभ किया. यह भवन अपनी सुंदरता, भव्यता और अद्भुत शिल्पकला के कारण तीनों लोकों में प्रसिद्ध होने वाला था.
Published at : 01 Jul 2026 06:02 AM (IST)
