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जांजगीर-चांपा: कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास की मिसाल बना सोठी आश्रम, CM विष्णुदेव साय ने किया दौरा


भारत में कुष्ठ रोग के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन प्रभावित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास की चुनौती को अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका है. इलाज के बाद भी बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को देखा जाता है, जिन्हें समाज की उपेक्षा और अस्वीकार का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता है. ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) स्थित ‘भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम’ को एक सशक्त मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. यहां कुष्ठ रोगियों को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि आश्रय, पुनर्वास, कौशल और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर भी प्रदान किया जा रहा है.

इलाज के साथ सिखाया जा रहा आत्मनिर्भर बनना

5 अप्रैल 1962 को समाजसेवी स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे की ओर से स्थापित इस आश्रम के माध्यम से शुरुआत से ही रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़े जाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है. इसे महज एक अस्पताल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि मरीजों को आत्मनिर्भर बनाए जाने के लिए खेती, बागवानी, सिलाई, कम्प्यूटर, वेल्डिंग और गाड़ी चलाने जैसे काम भी सिखाए जा रहे हैं. साथ ही, उनके बच्चों की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है.

आश्रम में 20 बिस्तरों का अस्पताल संचालित किया जा रहा है, जहाँ मुफ्त इलाज और रहने की सुविधा दी जाती है. वर्तमान में यहाँ 75 मरीजों को रखा गया है और करीब 120 लोगों को उनकी सेवा में लगाया गया है.

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नियमित लगाए जा रहे हैं स्वास्थ्य शिविर

संस्था की ओर से समय-समय पर मुफ्त स्वास्थ्य और आंखों की जांच के शिविर भी लगाए जाते हैं. अब तक 10 हजार से ज्यादा मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराए जा चुके हैं. हाल ही में बुधवार को लगाए गए शिविर में 300 से अधिक लोगों की जांच की गई और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बारे में जागरूकता भी फैलाई गई.

मुख्यमंत्री की ओर से लिया गया जायजा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तरफ से बुधवार को आश्रम का दौरा कर चिकित्सा सुविधाओं और पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया गया. उनकी ओर से आश्रम को “मानवता, करुणा और सेवा का सच्चा तीर्थ” करार दिया गया. यह स्पष्ट किया गया कि कुष्ठ रोग केवल शारीरिक पीड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक उपेक्षा का भी कारण रहा है. ऐसे लोगों को सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अवसर दिया जाना समाज की बड़ी जिम्मेदारी बताई गई है.

मुख्यमंत्री की ओर से गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण भी किया गया और कहा गया कि किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करना ही समाज की सबसे बड़ी सेवा है. सोठी आश्रम को उस मानवीय विकास मॉडल का एक सशक्त उदाहरण बताया गया है, जहाँ वंचितों को सम्मान, सहारा और आत्मनिर्भरता प्रदान की जाती है.

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