अस्पताल से सोनम वांगचुक ने सरकार को चिट्ठी लिखी. अनशन खत्म करने को लेकर मांगें रखीं. इसमें कहा कि आत्महत्या करनेवाले छात्रों के परिवार को मुआवजा मिले. संसद में बहस हो और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए. अपनी चिट्ठी में सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने बीती रात उनसे अस्पताल में मुलाकात की. इसके लिए उन्होंने दोनों नेताओं का आभार जताया.
सोनम वांगचुक ने लिखा, “चर्चा के दौरान आपने मुझे आश्वासन दिया था कि सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी जिसमें पेपर लीक होने के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा, संसद में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सार्थक चर्चा, जिसमें माननीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार भी शामिल है.”
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20 जुलाई का चलो संसद मार्च बहुत शांतिपूर्ण रहा- वांगचुक
अपनी चिट्ठी में उन्होंने ये भी कहा, “पुलिस की ज्यादतियों और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग के बावजूद 20 जुलाई का चलो संसद मार्च बहुत शांतिपूर्ण रहा. देश और पूरी दुनिया ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के प्रति उनके धैर्य और संकल्प को देखा. मुझे पूरी उम्मीद जताता हूं कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ किसी भी कानूनी मामले, उत्पीड़न या बदले की भावना से की गई कार्रवाई से लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनके भरोसे को और कम नहीं किया जाएगा.”
AN APPEAL TO THE GOVERNMENT
regarding breaking my fast… pic.twitter.com/v1fbZiI66b— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
लगभग 65 सांसदों ने अनशन खत्म करने की अपील की- वांगचुक
आगे उन्होंने लिखा, “आपके यहां आने के बाद, अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने मुझे पत्र लिखा. कुछ लोग आए भी और बाकियों के आज शाम तक आने की उम्मीद है. उन सभी ने मुझसे अपना अनशन खत्म करने की अपील की है और मुझे याद दिलाया है कि देश सेवा में मुझे अभी बहुत काम करना है. मैं उनकी बात से सहमत हूं.”
मैं जीना चाहता हूं, छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं- वांगचुक
चिट्ठी में उन्होंने ये भी कहा, “मैं जीना चाहता हूं. मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम की ओर वापस लौटना चाहता हूं जिसने मेरे जीवन को अर्थ दिया है. लेकिन मैं उन बहुत युवा लोगों की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था.”
किसी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ लीगल कार्रवाई न हो- वांगचुक
सोनम वांगचुक ने सरकार से अपील की कि सरकार ये आश्वस्त करे कि इस आंदोलन में शामिल होने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई लीगल कार्रवाई नहीं की जाएगी. उनकी गुनाह केवल इतना है कि उन्होंने जवाबदेह एजुकेशन सिस्टम के लिए आवाज उठाई. उन्होंने कहा, “अगर ऐसा भरोसा दिया जाता है तो मैं इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त करूंगा कि सरकार ने न केवल मेरी अपील को सुना बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी समझा.”
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