कहावत है, ‘हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फारसी क्या!’ लेकिन आज के इस डिजिटल और Gen Z वाले युग में इस कहावत को थोड़ा अपडेट करने की जरूरत है. और इसमें बिहारी तड़का लगा हो तो नया मुहावरा होना चाहिए- ‘हाथ में मोबाइल हो तो डर क्या और बिहारी जब फॉर्म में हो तो टियर गैस का असर क्या!’
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का जो नया अपग्रेडेड वर्जन दिल्ली में देखने को मिला, उसने यह साबित कर दिया है कि भारत में अब आंदोलन सिर्फ मांग मनवाने के लिए नहीं, बल्कि अपना भौकाल और लंतरानी यानी एटिट्यूड सेट करने के लिए भी होते हैं. खासकर जब बात दिल्ली बनाम बिहार के प्रदर्शनों की हो तो भैया फर्क बिल्कुल वैसा ही है, जैसे दिल्ली के मासूम मोमोज और बिहार का धधकता लिट्टी-चोखा.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे Gen Z के कुछ अद्भुत, अद्वितीय और पूरी तरह से गर्दामय प्रदर्शन पर एक नजर मार लेते हैं.
दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर जब पुलिस वॉटर कैनन चलाती है तो लोग छाता ढूंढते हैं या भाग खड़े होते हैं. जब यही काम हमारे बिहारी बाबू या जेन-जी छात्रों पर होता है तो उनका रिएक्शन होता है- ‘अरे वाह! भयंकर गर्मी में फ्री का रेन-डांस!’
वॉटर कैनन लेकर आए पुलिसवाले ने शायद सोचा होगा कि भय बिनु होइ न प्रीति, लेकिन यहां तो पानी की बौछार खाकर लड़के ऐसे उछलते दिखे, जैसे सावन का झूला झूल रहे हों. प्रशासन पानी मार रहा है भीड़ भगाने के लिए और लड़के आगे बढ़-बढ़कर कह रहे हैं, ‘थोड़ा पीठ पे भी मारिएगा सर, बहुत दिन से नहाए नहीं हैं. शायद इसे ही आपदा में अवसर ढूंढना कह गए हैं महापुरुष!
एक नौजवान हाथ में पुलिस के हेलमेट पर लगी फाइबर की जाली को लेकर इस कदर घूमता दिखा, जैसे ओलंपिक का गोल्ड उसके हाथ लग गया. किसी ने पूछा, ‘कहां से मिला?’ तो भाई साहब का जवाब और अंदाज ऐसा था, जैसे उसकी विक्ट्री परेड बस निकलने ही वाली है.
‘अरे कबाड़ दिए एकदम… मुड़िए पे लगा था’
अब बताइए! पुलिस जिसे अपनी सुरक्षा के लिए पहनती है, उसे हमारे ये शूरवीर ‘रिटर्न गिफ्ट’ समझकर घर ले जा रहे हैं. पुलिस के ही हथियार का इस्तेमाल धूप के चश्मे या सेल्फी प्रॉप की तरह किया जा रहा है. सच ही है भइया, बिहारी जुगाड़ के आगे नासा वाले भी पानी भरते नजर आते हैं.
तभी एक मोहतरमा दहाड़ती नजर आती हैं. आंखों में दहकते अंगारे और दमदार आवाज में कहती हैं, ‘ये दिल्ली नहीं है, बिहार है! एक पे लाठीचार्ज नहीं हुआ है, मारेगा तो तुरंत मारेगा… सच ही कहा है किसी ने कि बिहार की लड़कियां भी शेरनी होती हैं!
मतलब सूत न कपास, जुलाहे से लट्ठम-लट्ठा!… दिल्ली वालों का प्रदर्शन शायद कैंडल मार्च तक सिमट जाए, लेकिन बिहार में जब बात इज्जत पर आती है तो लड़के छोड़िए, लड़कियां भी चंडी का रूप धर लेती हैं. वह क्लियर मैसेज देती हैं कि आप लाठी चलाएंगे तो हम क्या आरती उतारेंगे? और दूसरी लड़की तो जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं वाला फंडा लगाते हुए कहती है कि ई बिहार है बाबू, जंतर-मंतर नहीं!
प्रदर्शन का सबसे शानदार और साइंस से लबरेज सीन तो बैरिकेड के साथ होने वाली रस्साकशी (Tug of War) का रहा. एक तरफ पुलिस के जवान पूरी ताकत से बैरिकेड पकड़े दिखे तो दूसरी तरफ छात्रों की फौज उसे अपनी तरफ खींचती नजर आई.
फिजिक्स के छात्रों ने सड़क पर न्यूटन का तीसरा नियम Every action has an equal and opposite reaction साबित कर दिया. मजे की बात तो यह रही कि कि बैरिकेड के पहियों का भी पूरा फायदा उठाया गया और बिहार के लाला खींचकर उसे अपने साथ ही ले गए.
अचानक भीड़ में एक शख्स नजर आया, जो कोई झंडा या बैनर नहीं, बल्कि लकड़ी काटने वाली विशालकाय मशीन Chainsaw लेकर आया था. शायद भाई बैरिकेड को बीच से चीरने का इरादा लेकर आया था. कमस से उसके आसपास कोई नजर नहीं आया. इसे कहते हैं शुद्ध भौकाल. काम हो या न हो, औजार ऐसा रखो कि सामने वाला खुद ही रास्ता नाप ले.
बिहारी Gen-Z का ग्रीक गॉड तो ऐसा लड़का बना, जिसकी आंखें लाल तो मुंह से धुआं निकलता दिखा. कसम से उसके चेहरे पर ऐसी चमक थी, जैसे उसने एवरेस्ट की चोटी फतेह कर ली हो. कैमरे के सामने उसने फूड ब्लॉगर अंदाज में जो कहा, उसे सुनकर शायद आप भी एक बार ट्राई कर ही लें.
‘First tear gas experience unlocked! कभी टेस्ट नहीं किए थे कि कैसा होता है… खुद जाके घुस गए धुआं में! बड़ी कड़क माल है गाइज… 0% एथेनॉल वाला!’
पुलिस ने सोचा था कि हम डंडा चलाकर डरा देंगे, लेकिन बिहारी लइके लाठी का इस्तेमाल सेल्फी स्टिक की तरह करने को बेताब दिखे. प्रशासन आंदोलन रोकने को परेशान दिखा तो हमारे युवा नया ‘एक्सपीरियंस’ अनलॉक करने की प्लानिंग करते नजर आए.
वैसे यह तो क्लियर हो गया कि ई बिहार है बाबू. यहां हर मुसीबत का एक ही इलाज है- ‘थोड़ा हंस लो, थोड़ा गर्दा उड़ा दो और बाकी सब ईश्वर पे छोड़ दो!’
बिहार के बवाल ने साबित कर दिया कि यह आंदोलन अब एक ‘इवेंट’ है. इसमें एक्शन है, इमोशन है, कॉमेडी है और सबसे बड़ी बात भरपूर कंटेंट है. पुलिस ड्यूटी कर रही है तो लइके ‘रील’ बना रहे हैं. भइया! कुछ भी कहो, जब बात बकैती और भौकाल की आती है तो इन युवाओं का कोई सानी नहीं है.
