सामाजिक कार्यकर्ता और मशहूर शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी. इससे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को बड़ा जनसमर्थन और मजबूत आधार मिला. हालांकि अब 27वें दिन (23 जुलाई) को उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया है.
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां जेपी नड्डा ने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया. इसके बाद वांगचुक ने शुक्रवार सुबह वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पिछले दो दिन से सरकार के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही थी. इस दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई और लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया.
जिन तीन मांगों पर सहमति के बाद वांगचुक ने अपना अनशन खत्म किया है. उनमें सरकार ने लिखित में प्रदर्शनकारी छात्रों पर केस दर्ज नहीं करने, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है.
क्या थी सोनम वांगचुक की मांगें
सोनम वांगचुक कॉकरोच पार्टी के आंदोलन से 28 जून को जुड़े, जब उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. सोनम वांगचुक की मांगें थीं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, NEET पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए. इसके अलावा एजुकेशन सिस्टम में सुधार कर जवाबदेही तय की जाए. इन सबके अलावा पेपर लीक से जुड़े छात्रों की आत्महत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए.
पहले भी कर चुके हैं भूख हड़ताल
बता दें कि सोनम वांगचुक का ये पहला अनशन नहीं था. इससे पहले उन्होंने मार्च 2024 में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर 21 दिनों तक भूख हड़ताल की थी. इसके बाद सितंबर 2024 में वे दिल्ली चलो पदयात्रा लेकर निकले, लेकिन दिल्ली की सीमा पर उनको हिरासत में लिया गया था.
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