धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया और प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त कर दिया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर धर्मेंद्र प्रधान का क्या होगा? धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक भविष्य किस तरफ जाएगा? इन सवालों का जवाब तलाशेंगे, लेकिन उससे पहले यह समझना आवश्यक है कि आखिर छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अचानक से इस्तीफा क्यों दिया? क्योंकि छात्र आंदोलन तो लंबे समय से चल रहा था और सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर तैयार नहीं थी.
दरअसल 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद छात्र आंदोलन का स्वरूप तेजी से बदल रहा था. बड़ी संख्या में देश भर के छात्र जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो रहे थे. यही नहीं देश के कई शहरों में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे.
CJP प्रतिनिधियों से नड्डा-सिंह ने की थी मुलाकात
इसी बीच सरकार की तरफ से जेपी नड्डा और डॉ जितेन्द्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की. CJP ने पहली शर्त ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रखी. दूसरी शर्त नीट की वजह से सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने की और तीसरी शर्त प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई ना हो.
इसी बीच सोशल मीडिया पर छात्रों ने जबरदस्त कैंपेन शुरू कर दिया. यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर देश भर में फैलने लगा. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से एक रात पहले जंतर-मंतर पर बड़ा तादाद में लोग इकट्ठा हो गए. सरकार के पास यह इनपुट लगातार आ रहा था कि कुछ तत्व इस आंदोलन को गुमराह कर सकते हैं और इसका फायदा उठाने का प्रयास कर सकते हैं.
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में क्या लिखा?
देश के कोने-कोने से आ रहे इनपुट के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर को प्रधानमंत्री को अपना त्याग पत्र सौंप दिया. अपने त्याग पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा, ‘पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देख कर मेरा मन दुखी है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है. देश की युवा शक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है. जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठा पाएं, देश की एकता बनी रहे. भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं. करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.’
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद BJP समर्थन में
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि नीट की दोबारा सफल परीक्षा कराई. पहले ही दिन से कभी भी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा है. प्रधान के इस्तीफे के बाद बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में पोस्ट किए. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा- केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) सहित कई महत्वपूर्ण पहल को सफलतापूर्वक लागू किया.
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बड़े हितों को सर्वोपरि रखते हुए उनका पद छोड़ने का निर्णय सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, नैतिकता और निस्वार्थ सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है. इस निर्णय में पार्टी पूरी मजबूती के साथ श्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़ी है. मैं उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी सभी प्रयासों के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं.
पद से महत्वपूर्ण देश के युवा: अमित शाह
वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा- भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं. आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है. मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है. पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा.
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है.
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इसके अलावा देश भर से बीजेपी नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान से उनके घर जाकर मुलाकात की. इन बयानों और मुलाकातों के बाद अब सवाल है कि धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? एक बात तो स्पष्ट है कि धर्मेंद्र प्रधान के साथ बीजेपी पूरी तरह से खड़ी है.
अब भविष्य में धर्मेंद्र प्रधान के लिए 3 विकल्प दिखाई देते हैं-
पहला- बीजेपी के संगठन में वापसी, लेकिन वरिष्ठ नेता होने के नाते पार्टी संगठन में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका क्या होगी, यह कह पाना मुश्किल है. हालांकि साल 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में बतौर चुनाव प्रभारी बीजेपी को दूसरी बात सत्ता में वापसी कराई थी, तो क्या एक बार फिर 2027 में यूपी चुनाव की जिम्मेदारी धर्मेंद्र प्रधान को मिलेगी?
दूसरा- कुछ महीनों के बाद एक बार फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी करना, राजनीतिक विश्लेषक इस कदम की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं.
तीसरा- बीजेपी के सियासी जानकार और कई राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा में वापसी हो सकती है, यानि राज्य में सबसे बड़े पद पर. यह एक ऑप्शन भी धर्मेंद्र प्रधान के लिए खुला हो सकता है.
अब देखना यही होगा कि बीजेपी धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक इस्तेमाल कहां करती है?
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