- उन्होंने सभी 20 याचिकाओं की अलग-अलग सुनवाई का अनुरोध किया।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोमवार (27 जुलाई, 2026) को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पार्टी सांसदों से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताते हुए एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने टीएमसी के बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की याचिकाओं पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग भी की है. अपने पत्र में बनर्जी ने अनुरोध किया कि बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने से जुड़ी याचिकाओं पर तुरंत सुनवाई की जाए.
उन्होंने पत्र में कहा कि याचिकाएं को दाखिल किए जाने के बाद से अब तक पांच हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन आज तक न तो कोई नोटिस जारी किया गया है, न ही कोई सुनवाई निर्धारित की गई है और न ही कोई प्रक्रियात्मक निर्देश पारित किया गया है.
लगातार निष्क्रियता गंभीर चिंता का विषय- अभिषेक
लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘इस तरह पर लगातार निष्क्रियता गंभीर चिंता की बात है. यह संविधान के 10वें शेड्यूल के पैरा 6 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को प्राप्त अधिकार हैं, जिसका एक उचित समयसीमा में इस्तेमाल किया जाना जरूरी है, ताकि एंटी-डिफेक्शन लॉ यानी दलबदल-रोधी कानून का प्रभाव और उसका उद्देश्य सुरक्षित रह सके.’
TMC MP Abhishek Banerjee has written to Lok Sabha Speaker Om Birla, raising concerns over issues related to party MPs and seeking urgent action on disqualification petitions against rebel MPs.
In his letter, Banerjee requested that the petitions related to the disqualification… pic.twitter.com/erpKhhpSLb
— ANI (@ANI) July 27, 2026
बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक पर बुलाने पर जताई आपत्ति
उन्होंने कहा, ‘इस मामले में तत्काल कार्रवाई की जरूरत सरकार के उस फैसले के बाद और ज्यादा बढ़ गई है, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री ने 19 जुलाई, 2026 को उन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में एक अलग समूह के तौर पर बुलाया, जिनके खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं. इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैं आपसे आदर के साथ अनुरोध करता हूं कि इन याचिकाओं को सुनवाई के लिए जल्द से जल्द लिस्ट किया जाए.’
सभी 20 सांसदों पर अलग-अलग सुनवाई करने की मांग
उन्होंने आगे कहा, ‘क्योंकि हर एक याचिका एक अलग सांसद की अयोग्यता से जुड़ा हुआ है और तथ्यों और लागू कानून के आधार पर स्वतंत्र फैसले की अपेक्षा करती है, इसलिए मैं यह भी अनुरोध करता हूं कि सभी 20 याचिकाओं की अलग-अलग सुनवाई की जाए.’
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