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ईरान जंग से बाहर नहीं निकला अमेरिका तो…, सीक्रेट मीटिंग में ट्रंप के जनरल ने चेताया


अमेरिका और ईरान के बीच करीब छह महीनों से जारी जंग अब एक नाजुक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास और यूएस जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ हेड जनरल डैन केन अब इस जंग से बाहर निकलना चाह रहे हैं. व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका को अब ईरान जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाशना चाहिए. उनका मानना है कि अगर अमेरिका सैन्य तकात बढ़ाता है तो यह उसके उल्टा पड़ सकता है. डैन केन ने मीटिंग में कहा कि ईरान पर केवल हवाई हमला करने से ट्रंप ने जो लक्ष्य तय किया है उसे नहीं पाया जा सकता है.

हवाई हमलों की सीमाएं और हथियारों की कमी

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में जनरल डैन केन, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ सहित कई प्रमुख कैबिनेट मंत्री शामिल थे. इसमें डैन केन ने कहा कि सेना और खुफिया रिपोर्टों से ये स्पष्ट हो चुका है कि केबल बमबारी करके ईरान को झुकने पर मजबूर नहीं किया जा सकता है. पिछले छह महीनों से जारी इस युद्ध के कारण अमेरिका के हथियारों का स्टॉक भी कम हो गया है.

अमेरिकी जनरल डैन केन इस बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मीटिंग करने वाले हैं. इस बैठक से पहले उन्होंने अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और सभी को एक मत पर लाने के लिए मिले थे. इसका मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि अमेरिका के पास अभी जो उपलब्ध सैन्य विकल्प हैं उसकी क्या सीमाएं और खतरे हैं. चाहे उनमें अमेरिकी सेना को जमीन पर उतारना शामिल हो या न हो. रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने बताया, ‘मुझे लगता है कि यह अमेरिकी सेना को सुरक्षा प्रदान करने और किसी भी बड़े नुकसान से बचाने का उनका अपना तरीका है.’

ट्रंप आदेश के इंतजार में यूएस आर्मी

एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप को कमेटी सैन्य विकल्पों के गंभीर नतीजों के प्रति आगाह कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ यह भी भरोसा दिला रहे हैं कि अगर ट्रंप आदेश दें तो यूएस आर्मी ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने में पूरी तरह सक्षम है. हालांकि यूएस के पास ईरान की जमीन पर सैनिक उतारने के विकल्प मौजूद हैं, लेकिन ट्रंप और उनके अधिकारी इसके पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान को खतरा हो सकता है.

इस जंग के छह महीने होने को हैं. अब अमेरिका का ध्यान ऐसा कूटनीतिक रास्ता खोजने पर है, जिससे ट्रंप अमेरिकी जनता के सामने एक सांकेतिक जीत का दावा कर सकें और साथ ही क्षेत्र में तनाव को कम भी किया जा सके. ट्रंप प्रशासन की अभी की प्राथमिकता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खुलवाने और ईरान के साथ संभावित कूटनीतिक समझौते को फाइनल करने की है. 



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