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खामेनेई के सलाहकार की बड़ी धमकी, ‘हिंद महासागर तक बढ़ सकता है युद्ध’


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  • हिंद महासागर में तनाव से भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी।

पश्चिम एशिया में तेहरान और वाशिंगटन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष और तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने युद्ध को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने एक और हमला किया, तो ईरान युद्ध का दायरा हिंद महासागर तक बढ़ा सकता है. उनके इस चेतावनी से दोनों पक्षों के बीच तनाव के और भी ज्यादा बढ़ने की आशंका है.

ईरान के फर्स न्यूज एजेंसी ने याह्या रहीम सफवी का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा, ‘क्योंकि यह संघर्ष पर्सियन गल्फ और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बढ़कर अब लाल सागर तक पहुंच गया है, इसलिए यह भी मुमकिन है कि आगे युद्ध की स्थिति में और भी ज्यादा विस्तार हो जाए और यह युद्ध हिंद महासागर या शायद उससे भी आगे तक पहुंच जाए.’

उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका और इजरायल की तरफ से दोबारा हमले शुरू किए जाते हैं, तो ईरानी सेना ने सबसे खराब स्थिति के लिए भी प्लानिंग कर रखी है.’

खामेनेई के सलाहकार ने क्या कहा?

मेजर जनरल सफवी ने लाल सागर के तटों पर कंट्रोल करने वाले यमन के हूतियों की भी सराहना करते हुए कहा, ‘100 सालों से ज्यादा वक्त से यमन के लोगों ने हर उस हमलावर ताकत का मजबूती से मुकाबला किया है, जिसने किसी भी तरह से उनकी क्षेत्रीय अखंडता को तोड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं यहां स्पष्ट तौर पर बोल रहा हूं कि अगर अमेरिकी एक नया युद्ध शुरू करते हैं, तो उनकी नजरों के सामने लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को केंद्र बनाकर एक नया फ्रंट खोला जा सकता है.’ 

US-ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका

ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार की तरफ से यह बयान ऐसे वक्त पर सामने आया है कि जब पर्सियन गल्फ, ओमान की खाड़ी और कई अन्य महत्वपूर्ण समुद्री ट्रेड रूट्स को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है. ईरान के अधिकारियों की ओर से बार-बार धमकियां दी जा रही हैं कि अगर अमेरिका फिर से किसी सैन्य कार्रवाई को अंजाम देता है, तो ईरान पूरे खाड़ी इलाके में अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ जोरदार जवाबी कार्रवाई कर सकता है.

वहीं, एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी सोमवार (21 सितंबर, 2026) को कहा कि अगर उसे और भी ज्यादा उकसाया गया, तो वह अपने सैन्य रणनीतियों और निशानों में बदलाव कर सकता है.

हिंद महासागर में बढ़ा गतिरोध, तो भारत पर क्या पड़ेगा असर?

अगर अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव हिंद महासागर की तरफ बढ़ता है, तो इसका असर खाड़ी इलाके से आगे तक पहुंच सकता है. हिंद महासागर एशिया के लिए एनर्जी और कमर्शियल जहाजों के आने-जाने का प्रमुख समुद्री रास्ता है. भारत हिंद महासागर या इंडियन ओशियन के उत्तर दिशा में स्थित है और हिंद महासागर के जरिए ही भारत के खाड़ी देशों, अफ्रीका और साउथ-ईस्ट एशिया के साथ व्यापक समुद्री ट्रेड लिंक्स है. ऐसे में अगर हिंद महासागर में युद्ध बड़े पैमाने पर तनाव पैदा करता है, तो इससे जहाजों की शिपिंग, बीमा, एनर्जी सप्लाइज और रिजनल ट्रेड से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं. 

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