कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं. सोमवार (10 अगस्त) को इसी सिलसिले में नई दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी बैठक हुई है, जिसमें प्रदेश के जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर मंथन हुआ. मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम सहित 75 पर्यवेक्षक मौजूद थे.
यूपी के 75 जिलों के अध्यक्षों के चयन के लिए पर्यवेक्षकों की बैठक बुलाई गई थी. कांग्रेस की इस हाईलेवल मीटिंग में तय हुआ है कि सभी पर्यवेक्षक अपने-अपने जिलों में जाएंगे और 25 अगस्त तक जिलों का दौरा करेंगे. 30 अगस्त तक सभी पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष और संगठन महासचिव को देंगे. सितंबर के पहले हफ्ते में जिला अध्यक्षों का चयन करने की अंतिम सीमा रखी गई है.
क्या बोले राहुल गांधी?
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों के चयन के लिए पर्यवेक्षकों को मंत्र दिया. राहुल गांधी ने कहा कि सभी पर्यवेक्षक ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ जिला अध्यक्षों के चयन के लिए जिलों में जाएं और निष्पक्ष ढंग से उम्मीदवारों की लिस्ट बनाएं. उन्होंने आगे कहा, आप कांग्रेस के भविष्य के लिए अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार का चयन करेंगे.
पर्यवेक्षक बनाएंगे तीन लोगों का पैनल
उन्होंने कहा, ‘हर पर्यवेक्षक तीन लोगों का पैनल बनाएगा. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण कार्य आपके जिम्मे है. निष्पक्षता के साथ ग्राउंड पर पहुंचकर उम्मीदवारों का पैनल बनाया जाए. अब कांग्रेस दिल्ली से नहीं जिलों से चलेगा. हमारा मकसद जमीनी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देना है.’
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यूपी कांग्रेस सांसदों संग मीटिंग कर चुके राहुल गांधी
इससे पहले राहुल गांधी ने 5 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पार्टी सांसदों के साथ एक अहम रणनीतिक बैठक की थी. मीटिंग में राज्य की राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक मजबूती और चुनावी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी. बैठक के दौरान सांसदों ने राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की ताज़ा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की विस्तृत रिपोर्ट दी थी.
सूत्रों के अनुसार, कई सांसदों ने समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन पर जल्द फैसला लेने की सलाह दी. उनका कहना था कि गठबंधन को लेकर अधिक देरी होने पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह भी राय बनी कि प्रदेश में पेपर लीक, युवाओं और शिक्षा, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महंगाई, एथेनॉल नीति और अयोध्या में चढ़ावे एवं चंदे में कथित गड़बड़ी जैसे मुद्दे जनता के बीच प्रमुख हैं और पार्टी को इन्हें मजबूती से ज़मीनी स्तर पर उठाना चाहिए.
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