पिछले हफ़्ते भारत ने वायु सेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाया है. वहीं फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने 3.25 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित डील के लिए नई दिल्ली को अपना टेक्निकल और कमर्शियल प्रस्ताव सौंपा है. मई में भारत की ओर से जारी लेटर ऑफ रिक्वेस्ट के जवाब में सौंपे गए इस प्रस्ताव में सरकारों के बीच हुए समझौते के तहत बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की योजना भी शामिल है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने फरवरी में इस खरीद के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (जरूरत की मंजूरी) दी थी. खरीद की बाकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस डील को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से मंज़ूरी लेनी होगी.
यह जरूरत भारत में फाइटर स्क्वाड्रन की लगातार कमी और तेजस Mk-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के तैयार होने में देरी के चलते पैदा हुई है. इसलिए 114 राफेल विमानों को सिर्फ मौजूदा बेड़े के विस्तार के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की मौजूदा कॉम्बैट क्षमता और भविष्य की घरेलू फाइटर फोर्स के बीच एक कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.
फ्रांस का क्या है प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 18 राफेल विमान फ्लाई-अवे स्थिति में सौंपे जाएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों को भारत में असेंबल किया जाएगा. इस तरह 80% से ज़्यादा विमान देश में ही असेंबल किए जाएंगे. जैसे-जैसे प्रोडक्शन लाइन आगे बढ़ेगी, उम्मीद है कि स्वदेशी पुर्जों और तकनीक का इस्तेमाल शुरुआती स्तर के लगभग 30% से बढ़कर 60% से ज़्यादा हो जाएगा.
स्वदेशी हथियारों और सिस्टम को जोड़ने की मांग
भारतीय वायु सेना ने 88 सिंगल-सीट और 26 ट्विन-सीट वाले विमानों की जरूरत बताई है. उम्मीद है कि डसॉल्ट, असेंबली और सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए भारतीय प्राइवेट सेक्टर के पार्टनर के साथ काम करेगा. भारत ने स्वदेशी हथियारों और सिस्टम को जोड़ने की भी मांग की है, जिसमें सुरक्षित डेटा लिंक भी शामिल हैं जो फाइटर जेट्स को भारतीय रडार, सेंसर और युद्ध के मैदान के दूसरे नेटवर्क से जोड़ सकें.
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