जब आप दुनिया की सबसे पावरफुल जॉब में से एक को संभाल रहे हों और घर पर दो छोटे बच्चे आपका इंतजार कर रहे हों, तो क्या सच में सब कुछ परफेक्ट हो सकता है? यह सवाल इन दिनों सिर्फ कैरोलिन लेविट के इस्तीफे की वजह नहीं बना, बल्कि पूरे अमेरिका में एक ऐसी बहस छेड़ गया है जो हर कामकाजी मां की जद्दोजहद बयान करती है. 28 साल की व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन ने पद छोड़ दिया है. कैरोलिन ने कहा, ‘मैं अपने दो छोटे बच्चों की वो मां नहीं बन सकती, जिसकी वे हकदार हैं.’ तो क्या करियर और पेरेंटिंग में एक साथ कामयाब होना वाकई नामुमकिन है…
कौन हैं कैरोलिन लेविट?
28 साल की कैरोलिन लेविट अमेरिकी इतिहास में सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी बनीं. वे अपने पति निकोलस रिकियो के साथ दो बच्चों एक 2 साल का बेटा और मई 2026 में पैदा हुई बेटी विवियाना की मां हैं. कैरोलिन ने ट्रंप के 2024 के चुनावी अभियान के दौरान नेशनल प्रेस सेक्रेटरी के तौर पर काम किया और बाद में यह टॉप पद संभाला.
कैरोलिन को मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) आंदोलन की उभरती हुई स्टार वुमेन माना जाता था, जो यह दिखाती थीं कि महिलाएं करियर और मातृत्व को एक साथ संभाल सकती हैं.
कैरोलिन क्यों छोड़ रही हैं व्हाइट हाउस?
कैरोलिन के लिए यह नौकरी कोई आम नौकरी नहीं, बल्कि एक ‘मिशन’ था. कैरोलिन ने इस अनुभव को ‘जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मानित और साहसिक सफर’ बताया. लेकिन मई 2026 में बेटी के जन्म के बाद जब वे मैटरनिटी लीव से लौटीं, तो उन्हें महसूस हुआ कि इस पद की मांगें और मां बनने की जिम्मेदारी, दोनों को न्याय देना नामुमकिन है.
ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की और लेविट के फैसले को ‘पूरी तरह समझने और सम्मान देने लायक’ बताया. ट्रंप ने यह भी कहा कि लेविट अब उनकी ‘टॉप बाहरी सलाहकार’ बनेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में एक प्रभावशाली आवाज बनी रहेंगी.
‘सब कुछ संभव है’ से ‘मुश्किल’ तक का सच्चा सफर
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू लेविट के अपने ही बयानों में आया उलटफेर है. महज दो हफ्ते पहले उन्होंने फॉक्स न्यूज पर एक इंटरव्यू में दावा किया था कि ट्रंप प्रशासन ‘युवा माता-पिता के लिए काम और जीवन का संतुलन’ बनाने में मदद करता है. कैरोलिन ने कहा था, ‘आप दोनों कर सकते हैं… और एक परिवार होना सब कुछ और भी बेहतर बना देता है.’
हालांकि, असलियत बिल्कुल उलट निकली. 2024 में अपने बेटे के जन्म के महज चार दिन बाद ही उन्हें काम पर लौटना पड़ा, जब ट्रंप की हत्या की कोशिश हुई थी. इस बार बेटी के जन्म के बाद उन्होंने करीब एक महीने की छुट्टी ली, लेकिन ट्रंप खुद उन्हें फोन करके पूछते थे कि वे कब लौटेंगी. यह दबाव और इस नौकरी की 24×7 मांग ने उन्हें इस कठिन फैसले पर मजबूर कर दिया. कैरोलिन ने कहा कि ‘सब कुछ एक साथ’ कर पाना हमेशा मुमकिन नहीं होता, चाहे आप दुनिया की सबसे ताकतवर इमारत में सबसे ऊंचे पदों में से एक पर क्यों न हों.
पूरे अमेरिका में क्यों छिड़ी यह बहस?
लेविट के इस्तीफे ने उस पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी है कि ‘क्या एक महिला करियर और बच्चों की परवरिश, दोनों में मुकम्मल हो सकती है?’ पर यह बहस अब सिर्फ राजनीति के दायरे में नहीं, बल्कि हर उस घर और ऑफिस तक पहुंच गई है, जहां कामकाजी महिलाएं हैं:
1. MAGA विचारधारा का बड़ा विरोधाभास
रिपब्लिकन पार्टी के MAGA खेमे में पारंपरिक रूप से महिलाओं को पत्नी और मां की भूमिका में देखा जाता है. लेविट जैसी महत्वाकांक्षी महिला को ऊपर उठाना इस सोच के खिलाफ था. उन्हें ‘प्रो-नेटलिस्ट’ (जन्म दर बढ़ाने वाले) प्रोपेगंडा का चेहरा बनाया गया, लेकिन जैसे ही उन्होंने करियर को छोड़ा, यह साफ हो गया कि यह संतुलन सिर्फ एक दिखावा था. CNN के मुताबिक, ‘लेविट का जाना राजनीतिक नुकसान है.’ यह दिखाता है कि MAGA आंदोलन के लिए भी वे कितनी अहम थीं.
2. सरकारी नीतियों की बड़ी कमी
अमेरिका इकलौता विकसित देश है, जहां ऑर्गनाइजेशन लेवल पर पेड पैरेंटल लीव की कोई कानूनी नीति नहीं है. लेविट ने अपनी बेटी के जन्म के बाद सिर्फ करीब तीन महीने की छुट्टी ली और वो भी अपनी मर्जी से, क्योंकि उनके पास विकल्प थे. आम अमेरिकी महिलाओं के लिए यह सुविधा नहीं, बल्कि एक मजबूरी है, क्योंकि छुट्टी पर जाने का मतलब है बिना तनख्वाह के घर बैठना.
3. आम महिला की मजबूरी बनाम अमीरों की लग्जरी
यहां सबसे तीखा सवाल खड़ा होता है कि अगर देश की सबसे ताकतवर महिलाओं में से एक को यह जंगली संतुलन बनाना मुश्किल लग रहा है, तो आम मांओं की क्या गति होगी? लेविट के पास नानी, हेल्पर और बाहरी सलाहकार बनकर पैसे कमाने का ऑप्शन था, जबकि आम महिलाओं को आर्थिक जरूरतों के चलते मजबूरन काम करना पड़ता है. चाहे उनके बच्चे कितने भी छोटे क्यों न हों.
4. समाज और राजनीति में बंटी हुई राय
पब्लिक ओपिनियन पोल (सर्वेक्षण) के आंकड़े भी इस विभाजन को साफ दिखाते हैं. 43% महिलाएं करियर चुनेंगी, जबकि 43% घर पर रहना पसंद करेंगी. 52% डेमोक्रेट महिलाएं करियर चुनती हैं, जबकि रिपब्लिकन महिलाओं में यह संख्या (45% करियर बनाम 44% घर) लगभग आधी-आधी बंटी हुई है. इसके अलावा, समाज का दोहरा मापदंड भी बड़ी बाधा है, जो महिला करियर को प्राथमिकता देती है, उसे ‘स्वार्थी’ करार दिया जाता है. एक पुरुष को ‘महत्वाकांक्षी’ और ‘परिवार का कमाने वाला’ कहा जाता है.
5. पत्रकारों और राजनेताओं की प्रतिक्रिया
लेविट के इस्तीफे पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं. CNN की कैटलन कॉलिन्स ने लेविट की ‘संघर्षपूर्ण शैली’ की आलोचना की. डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि जेम्स वॉकिंशॉ ने कहा कि उन्हें लेविट की पारिवारिक वजहों पर संदेह नहीं है, लेकिन ‘यह एक कठिन काम है. यह एक ऐसा काम है जहां, डोनाल्ड ट्रंप के प्रवक्ता बनने के लिए, आपको रोजाना जानबूझकर हकीकत से इनकार करना पड़ता है.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘मुझे लगता है कि उनकी विरासत व्हाइट हाउस और प्रेस के बीच संबंधों को और खराब करने की होगी.’
पूर्व व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी खुद एक मां हैं और वे कहती हैं, ‘मुझे नहीं पता कि उनकी सारी वजहें क्या हैं, लेकिन मैं इन चीजों को संतुलित करने की मुश्किल को पूरी तरह समझती हूं.’ यह कबूलनामा उस दबाव को दिखाता है, जो पॉवरफुल पदों पर बैठी महिलाओं को भी झेलना पड़ता है.
6. प्रेस की स्वतंत्रता पर गहरा असर
लेविट के कार्यकाल ने प्रेस की स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंचाया. CNN के मुताबिक, ‘ट्रम्प ने रिपब्लिकन में प्रेस की संवैधानिक भूमिका को पहले कभी नहीं के बराबर खतरे में डाला है.’ पत्रकारों को डर है कि लेविट के जाने के बाद एक बेलगाम राष्ट्रपति के फैसलों की रिपोर्टिंग करना और भी मुश्किल हो जाएगा.
क्या इस्तीफे की कोई और वजह?
इस्तीफे की घोषणा का समय काफी चर्चित रहा है क्योंकि यह एक बड़े विवाद के ठीक एक दिन बाद आया. 12 अगस्त 2026 को सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने व्हाइट हाउस के फैसले पर कांग्रेसी ब्रीफिंग की मांग की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेविट उस ‘डिकॉय प्लेन’ पर सवार थीं जबकि ट्रंप दूसरे विमान में थे. 8 जुलाई 2026 की शाम को अंकारा एयरपोर्ट पर लेविट के एयर फोर्स वन डिकॉय प्लेन पर होने का वीडियो भी सामने आया है.
CBS न्यूज़ ने बताया कि 100 से ज्यादा स्टाफ सदस्य और पत्रकार डिकॉय प्लेन पर थे, जिनमें लेविट भी शामिल थीं. हालांकि, इन घटनाओं के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है, लेकिन टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
अब आगे क्या होगा?
ट्रंप ने अभी तक लेविट के रिप्लेसमेंट का ऐलान नहीं किया है, लेकिन चर्चा है कि प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली, कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन च्युंग, ट्रंप की पूर्व वकील अलीना हब्बा और ब्रेइटबार्ट के वाशिंगटन ब्यूरो चीफ मैथ्यू बॉयल इस दौड़ में शामिल हैं. लेविट का आखिरी दिन अगस्त 2026 के अंत में होगा और वे एक बाहरी सलाहकार के रूप में ट्रंप के साथ जुड़ी रहेंगी, साथ ही आने वाले मिडटर्म चुनावों में भी अहम भूमिका निभाएंगी.
