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‘सरकार पर कोई संकट नहीं’, अंदरूनी अस्थिरता के दावे पर उमर अब्दुल्ला की दो टूक


जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी सरकार में अंदरूनी अस्थिरता और कैबिनेट फेरबदल को लेकर चल रही अटकलों को खारिज कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि सरकार में किसी तरह का संकट नहीं है और प्रशासन का कामकाज सामान्य तरीके से चल रहा है. मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट में बदलाव कब और किन परिस्थितियों में होगा, इसका फैसला वह खुद करेंगे.

अपने ‘राबता’ कार्यालय के बाहर बातचीत में जब उमर अब्दुल्ला से सरकार में संभावित फेरबदल को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “सरकार में कोई संकट नहीं है. हमारा काम चल रहा है.”

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कैबिनेट में बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा था कि 15 अगस्त के तुरंत बाद फेरबदल कर दिया जाएगा. उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि 15 अगस्त से पहले कोई बदलाव नहीं होगा. उमर ने कहा, “मैंने केवल 15 अगस्त से पहले फेरबदल की संभावना को खारिज किया था और उसके तुरंत बाद ऐसा करने का कोई वादा नहीं किया था. मैंने बस इतना कहा था कि यह 15 अगस्त से पहले नहीं होगा. यह कब और किन परिस्थितियों में होगा, यह मुझ पर छोड़ दें.”

कैबिनेट में जगह को लेकर खींचतान की चर्चा

हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कैबिनेट में जगह पाने को लेकर नेताओं के बीच खींचतान चल रही है. बताया जा रहा है कि कई वरिष्ठ नेता मंत्री बनने की कोशिश में हैं. खासकर श्रीनगर से आने वाले कुछ नेता कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं.

दरअसल, 10 अगस्त को उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि कैबिनेट में फेरबदल की योजना है. लेकिन उस समय स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को देखते हुए उन्होंने बदलाव को टाल दिया था. उनका कहना था कि मौजूदा मंत्रियों और जिला नेताओं को 15 अगस्त के कार्यक्रमों की तैयारी करनी थी.

उन्होंने कहा था, “15 अगस्त से ठीक पहले नए मंत्रियों की विस्तारित सूची की घोषणा करना ‘बहुत बड़ा अन्याय’ होगा, जबकि मौजूदा मंत्री और जिला नेता स्वतंत्रता दिवस पर अपने-अपने मुख्य भाषण लिखने और उनका अभ्यास करने में पूरी तरह व्यस्त हैं.”

विधानसभा सत्र के बाद हो सकता है फैसला

फिलहाल जम्मू-कश्मीर कैबिनेट में 6 मंत्री हैं, जबकि 3 पद खाली हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र 21 सितंबर से शुरू होने वाला है. ऐसे में कैबिनेट फेरबदल को लेकर अब तस्वीर सत्र के दौरान या उसके बाद ही साफ होने की संभावना है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अब, कैबिनेट में फेरबदल या तो सत्र के दौरान होगा या उसके बाद.”

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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 फीसदी तक सीमित है. 90 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 9 मंत्री हो सकते हैं. ऐसे में खाली तीन पदों को भरने को लेकर पार्टी के भीतर आने वाले दिनों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं.



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