- धमकियों में निजी जानकारी से कर्मचारियों में सुरक्षा चिंता बढ़ी.
जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही नई आतंकी धमकियों ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन धमकियों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है. उन्होंने सुरक्षा, पुलिस और खुफिया एजेंसियों को धमकियों के स्रोत का पता लगाने के लिए गहन जांच के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी धमकियों को किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि धमकियां बिल्कुल नहीं आनी चाहिए और साथ ही कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों को इन बातों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
‘सरकार पर कोई संकट नहीं’, अंदरूनी अस्थिरता के दावे पर उमर अब्दुल्ला की दो टूक
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि धमकी देने वालों तक पहुंचना जरूरी है. इसके लिए पुलिस और खुफिया एजेंसियों को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि इन धमकी भरे पोस्टरों और संदेशों के पीछे कौन है.
मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की सीधी जिम्मेदारी उनके पास नहीं है. उन्होंने कहा, “कानून-व्यवस्था मेरी सीधी ज़िम्मेदारी नहीं है,और यह मामला लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा द्वारा संभाला गया था.” उन्होंने आगे कहा, “कानून-व्यवस्था प्रशासन को मेरी सलाह होगी कि वे इसे हल्के में न लें. इसकी पूरी जांच होनी चाहिए.”
आतंकवाद खत्म होने के दावे पर उमर का सवाल
उमर अब्दुल्ला ने इस पूरे घटनाक्रम को उन दावों से भी जोड़कर देखा, जिनमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पूरी तरह खत्म होने की बात कही जाती रही है. उन्होंने ऐसे दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आतंकवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है तो फिर इस तरह की धमकियां कहां से आ रही हैं. उन्होंने कहा, “हम बार-बार सुन रहे हैं कि उग्रवाद खत्म हो गया है लेकिन फिर यह धमकी आती है, तो यह धमकी कहां से आ रही है?”
मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि वह इन धमकियों को सिर्फ एक सामान्य धमकी मानकर नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को मामले की तह तक जाना होगा और धमकी देने वालों की पहचान करनी होगी.
पहले भी पंडित कर्मचारियों को बनाया गया था निशाना
उमर अब्दुल्ला ने करीब दो से ढाई साल पहले सामने आए ऐसे ही हालात को भी याद किया. उस दौरान कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय पैदा हुए हालात से सरकार को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था. उन्होंने कहा, “अपने सभी कर्मचारियों को सुरक्षित रखना और उनकी सुरक्षा करना पुलिस की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है.”
मुख्यमंत्री ने पिछली रणनीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब पंडित कर्मचारियों के बीच डर का माहौल बना था, तब उन्हें घाटी छोड़ने से रोकने के लिए ट्रांजिट कैंपों में ही रोक दिया गया था. उमर अब्दुल्ला का कहना है कि सिर्फ आवाजाही पर रोक लगाने के बजाय खुफिया जानकारी के आधार पर रणनीतिक तरीके से पुलिसिंग की जानी चाहिए.
धमकी वाले पोस्टर से फिर बढ़ी चिंता
इस बीच जम्मू-कश्मीर में एक और ऑनलाइन धमकी भरा पोस्टर सामने आया है. इसमें जम्मू-कश्मीर के डीजीपी और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को बडगाम और अनंतनाग के ऊंचाई वाले इलाकों में दौरे को लेकर धमकी दी गई है. कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी देने वाले पोस्टर के साथ यह पोस्टर भी ULC नाम के आतंकी संगठन के नाम से जारी किया गया है.
हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इन पोस्टरों की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की है, लेकिन धमकियों के बाद जम्मू चले गए या घर से काम कर रहे कई कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने फिर से सुरक्षा की मांग उठाई है.
डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग के उस आधिकारिक बयान के बाद कि प्रशासन ने प्रधानमंत्री पैकेज के कर्मचारियों को घर से काम करने का कोई आदेश नहीं दिया है, कर्मचारियों ने स्थिति साफ करने के लिए मुख्य सचिव अतुल डुल्लू को पत्र लिखा है.
कांग्रेस ने भी सुरक्षा की मांग की
मामले को लेकर कांग्रेस ने भी चिंता जताई है. जम्मू में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने कहा कि धमकी पाने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि इन धमकियों के पीछे कौन लोग हैं.
रवींद्र शर्मा ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की धमकी सामने आई हो. पहले भी टारगेटेड किलिंग की घटनाएं हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए.
धमकी में कर्मचारियों की जानकारी भी
इस बार सामने आई धमकी को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और उनके जम्मू के पते तक लिखे होने की बात सामने आई है. इससे उन कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट राकेश हंडू ने भी वीडियो बयान जारी कर खतरे और सरकार की ओर से उठाए गए सुरक्षा कदमों पर स्पष्टता की मांग की है. उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई है.
फिलहाल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का जोर इस बात पर है कि धमकियों को हल्के में लेने के बजाय इनके स्रोत का पता लगाया जाए. उनका कहना है कि सरकार के हर कर्मचारी की सुरक्षा जरूरी है और सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच करनी चाहिए.
