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डूंगरपुर: सरकारी स्कूल की छत ढही, बाल-बाल बची 120 बच्चों की जान


राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. देवाड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तू देवकी स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल में सोमवार (24 ) को एक जर्जर कमरे की छत अचानक भरभराकर गिर गई. गनीमत रही कि हादसे के वक्त स्कूल में पढ़ाई चल रही थी, लेकिन जिस कमरे की छत गिरी, उसे पहले ही असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था. ऐसे में बड़ा हादसा टल गया और करीब 120 बच्चों की जान बच गई.

पढ़ाई के बीच अचानक आई तेज आवाज

जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब 10 बजे स्कूल में बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे. शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने में व्यस्त थे. इसी दौरान स्कूल परिसर में स्थित लंबे समय से बंद पड़े जर्जर कमरे की छत अचानक तेज आवाज के साथ नीचे आ गिरी.

छत गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि स्कूल में मौजूद बच्चों और शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई. किसी अनहोनी की आशंका के चलते शिक्षक और बच्चे तुरंत कमरों से बाहर निकल आए. मौके पर पहुंचकर देखा गया तो जर्जर कमरे की छत का बड़ा हिस्सा पूरी तरह ढह चुका था और मलबा कमरे में बिखरा हुआ था.

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एक साल से बंद था जर्जर कमरा

स्कूल प्रबंधन के अनुसार हादसे का कारण बने कमरे की हालत काफी समय से खराब थी. सुरक्षा को देखते हुए करीब एक साल पहले ही कमरे को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और उसमें बच्चों को बैठाकर पढ़ाई नहीं कराई जा रही थी.

स्कूल में कुल 10 कमरे बताए गए हैं, जिनमें से दो कमरे जर्जर हालत में हैं. इनमें से एक कमरे की छत अब पूरी तरह गिर चुकी है, जबकि दूसरे कमरे की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है. स्कूल प्रबंधन की ओर से एहतियात बरतते हुए जर्जर कमरों का इस्तेमाल बंद रखा गया था.

बच्चों की मौजूदगी के दौरान हुआ हादसा

हादसे की सबसे बड़ी राहत यही रही कि जिस कमरे की छत गिरी, उसमें बच्चे नहीं बैठे थे. अगर इस कमरे का इस्तेमाल कक्षा संचालन के लिए किया जा रहा होता तो हादसा गंभीर रूप ले सकता था. स्कूल में उस समय करीब 120 बच्चे मौजूद थे, लेकिन समय रहते की गई सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी भी बच्चे या शिक्षक के घायल होने की सूचना नहीं है.

घटना के बाद स्कूल परिसर में कुछ समय के लिए हड़कंप की स्थिति रही. शिक्षकों ने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और अधिकारियों को घटना की जानकारी दी.

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

घटना की सूचना मिलने के बाद पीईईओ पंकज वर्मा और सीबीईओ दीपक शाह मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने स्कूल परिसर का निरीक्षण कर जर्जर कमरों और गिरी हुई छत की स्थिति का जायजा लिया.

सीबीईओ दीपक शाह ने बताया कि स्कूल में कुल 10 कमरे हैं, जिनमें से दो कमरे जर्जर हो चुके हैं. सुरक्षा की दृष्टि से इनमें से एक कमरे को पहले ही बंद कर दिया गया था. उन्होंने बताया कि जर्जर कमरों की मरम्मत और नई छत डालने के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं. स्वीकृति मिलते ही जल्द ही आवश्यक काम करवाने की बात कही गई है.

समय रहते नहीं हटाई गई जर्जर छत, उठे सवाल

हालांकि जर्जर कमरे को पहले ही बंद कर दिया गया था, लेकिन छत गिरने की घटना ने सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सवाल यह भी है कि जब कमरे को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, तो उसकी मरम्मत या छत को हटाने का काम अब तक क्यों नहीं हुआ.

फिलहाल राहत की बात यह है कि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई. स्कूल प्रबंधन की सतर्कता के चलते बच्चों को जर्जर कमरे से दूर रखा गया था. अब अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि जर्जर कमरों की मरम्मत और नई छत का काम कितनी जल्दी शुरू होता है.

फिलहाल विभाग की ओर से जर्जर कमरों की मरम्मत और नई छत के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई है. मंजूरी मिलने के बाद स्कूल में आवश्यक निर्माण कार्य कराया जाएगा.

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