हिमाचल प्रदेश (Himachal News) की सियासत में इन दिनों ‘राष्ट्रगान’ को लेकर घमासान जारी है. इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (CM Sukhvinder Singh Sukhu) ने एक तरफ जहां बीजेपी पर तीखा पलटवार किया है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेशवासियों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दो बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. प्रदेश के स्कूलों में अब एडमिशन के दौरान छात्रों से उनकी जाति नहीं पूछी जाएगी, और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्तियों के शोषण पर भी ब्रेक लगा दिया गया है.
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की है. उन्होंने घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र (Academic Session) से स्कूलों के एडमिशन फॉर्म (School Admission Form) में ‘जाति’ (Caste) का कॉलम पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा. सीएम ने कहा कि शिक्षा के मंदिर में जाति वर्गीकरण खत्म होने से बच्चों में किसी भी प्रकार की हीन भावना पैदा नहीं होगी और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे.
CM सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस, क्या है मामला?
मेडिकल कॉलेजों में अब नहीं होगी आउटसोर्स नर्सों की भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए भी सीएम सुक्खू ने बड़ी राहत का ऐलान किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्सों की भर्ती ‘आउटसोर्स’ (Outsource Recruitment) के आधार पर नहीं की जाएगी.
भविष्य में होने वाली सभी भर्तियां ‘राज्य चयन आयोग’ (State Selection Commission) के माध्यम से नियमित (Regular) रूप से होंगी. इस कदम से आउटसोर्स व्यवस्था में होने वाले आर्थिक और मानसिक शोषण पर रोक लगेगी और कर्मचारियों के नियमितीकरण की राह आसान होगी.
BJP ला रही विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव
विधानसभा में राष्ट्रगान विवाद (National Anthem Row) को लेकर सीएम सुक्खू ने बीजेपी को आड़े हाथों लिया. बीजेपी द्वारा लाए जा रहे विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी महज अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है.
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “राष्ट्रगान का गायन होने के बाद उस पर सवाल उठाना ही असल में राष्ट्रगान का अपमान है. राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों ही कांग्रेस पार्टी की देन हैं.” सीएम ने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी झूठ बोलकर भ्रम फैलाने की यह राजनीति जारी रखती है, तो कांग्रेस भी बीजेपी नेताओं के खिलाफ विधानसभा में ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’ (Privilege Motion) पेश करने से पीछे नहीं हटेगी
‘BJP के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा’, जयराम ठाकुर पर विक्रमादित्य का पलटवार
