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Using Phone On Toilet Risks: टॉयलेट सीट पर बैठकर चलाते हैं फोन, डॉक्टर से जानें यह आदत आपको कैसे कर रही बीमार?


Is It Bad To Use Phone On Toilet: हम में से ज्यादातर लोग ये आदत अपना चुके हैं कि टॉयलेट पर बैठते ही फोन निकाल लेना और फिर कब 10 से 15 मिनट निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता. यह आदत देखने में बिल्कुल सामान्य और हार्मलेस  लगती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह आपकी पेल्विक हेल्थ को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे क्या नुकसान होते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. प्रमोद कदम ने TOI को बताया कि  टॉयलेट का एक खास मकसद होता है और जितना ज्यादा समय आप वहां बिताते हैं, उतना ही शरीर पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है. जब आप टॉयलेट सीट पर बैठते हैं, तो आपके रेक्टम को वैसा सपोर्ट नहीं मिलता जैसा एक सामान्य कुर्सी पर मिलता है. ऐसे में ग्रैविटी के कारण खून नीचे की तरफ जमा होने लगता है और समय बढ़ने के साथ प्रेशर भी बढ़ता जाता है.

अगर आप 10 मिनट से ज्यादा बैठते हैं, तो यह दबाव आपके ब्लड वेसल्स पर असर डालने लगता है. इसका सबसे आम नतीजा होता है पाइल्स. यह दरअसल एनल कैनाल की सूजी हुई नसें होती हैं, जिनमें दर्द और ब्लीडिंग हो सकती है.

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बॉडी की नैचुरल सिस्टम भी प्रभावित

लेकिन समस्या सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती एक्सपर्ट बताते हैं कि फोन चलाते समय हमारी बॉडी की नैचुरल सिस्टम भी प्रभावित होती है. जब आप स्क्रीन में खो जाते हैं, तो शरीर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं. इससे मल ज्यादा देर तक कोलन में रहता है, सूख जाता है और बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. यही कारण है कि कब्ज, पाइल्स और एनल फिशर जैसी समस्याएं बढ़ती हैं.

क्या है बचने का तरीका?

डॉक्टर इसे स्ट्रेनिंग पैराडॉक्स भी कहते हैं. यानी आप जानबूझकर जोर नहीं लगा रहे होते, फिर भी लंबे समय तक बैठने से पेल्विक फ्लोर पर लगातार हल्का दबाव बना रहता है. इससे एनल कैनाल की नाजुक परत में दरार आ सकती है, जिसे फिशर कहा जाता है और यह काफी दर्दनाक होता है. इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि 5 मिनट का नियम. डॉ कदम के अनुसार, अगर 5 मिनट में काम पूरा नहीं होता, तो उठ जाना चाहिए और बाद में फिर कोशिश करनी चाहिए. टॉयलेट को लाइब्रेरी या ऑफिस की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है.

फोन को टॉयलेट से दूर रखा जाए

इस नियम को अपनाने के लिए सबसे जरूरी है कि फोन को टॉयलेट से दूर रखा जाए. बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के आप अपने शरीर के संकेतों को बेहतर समझ पाएंगे और जरूरत से ज्यादा समय भी नहीं बिताएंगे. इसके अलावा, बैठने का तरीका भी मायने रखता है. पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखने से शरीर का एंगल सही हो जाता है, जिससे प्रक्रिया आसान और जल्दी पूरी होती है. डॉक्टर्स यह भी सलाह देते हैं कि शरीर के संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें, पर्याप्त पानी पिएं और फाइबर युक्त खाना खाएं. ये छोटी-छोटी आदतें मिलकर बड़ी समस्याओं से बचाती हैं. टॉयलेट पर फोन चलाना भले ही मामूली लगे, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है. इसलिए अगली बार जब आप टॉयलेट जाएं, तो फोन बाहर ही छोड़ दें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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