दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए गाजियाबाद के संजय आजाद के मामले को लेकर अब नई जानकारी सामने आई है. पुलिस ने इस मामले में आरोपी स्वतन्त्र भारद्वाज और उसके दोस्त के खिलाफ 23 जून को एफआईआर दर्ज की थी. हालांकि उसमें जो धाराएं लगाई गई थी वो सभी जमानती हैं.
पुलिस ने जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी. वो सेक्शन 115(2), 126(2) और 3(5) है. बता दें कि ये सभी सेक्शन जमानती है. दिल्ली पुलिस ने इसी आधार पर दोनों आरोपियों को नोटिस जारी किया था. इसके बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ कर उन्हें छोड़ दिया था. अब हंगामा मचने के बाद जल्द ही इस मामले में दिल्ली पुलिस चार्जशीट फाइल करेगी.
किन धाराओं में दर्ज की गई FIR
जो धाराएं लगाई गईं वो कि उसमें क्या प्रावधान है और कितनी सजा है तो बता दें कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2) गलत तरीके से रोकने (Wrongful Restraint) के अपराध के लिए दंड का प्रावधान करती है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) सामान्य आशय (Common Intention) से संबंधित है, जो पुराने कानून यानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 34 के समान है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 115(2) स्वेच्छा से किसी को चोट पहुंचाने (Voluntarily causing hurt) यानी मारपीट या धक्का-मुक्की करने के अपराध से संबंधित है. यह पुरानी आईपीसी (IPC) की धारा 323 के बराबर है.
VIDEO | Ghaziabad: CJP activist’s father, Sanjay Azad, who was allegedly attacked during Jantar Mantar protest, says, “When we fight against injustice and raise our voice against the government, we chant ‘Jai Bhim.’ Some people have a problem with the slogan ‘Jai Bhim.’ As… pic.twitter.com/e90DoJZczD
— Press Trust of India (@PTI_News) September 4, 2026
क्या बोले संजय आजाद
सीजेपी एक्टिविस्ट निशु के पिता संजय आजाद, जो जंतर-मंतर पर घायल हुए थे, उन्होंने शुक्रवार (4 सितंबर) को न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा कि जब हम अन्याय के खिलाफ लड़ते हैं और सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो ‘जय भीम’ का नारा लगाते हैं और कुछ लोगों को ‘जय भीम’ के नारे से दिक्कत है.
संजय आजाद ने बताया कि बाबासाहेब के अनुयायी होने के नाते हमें पता था कि वे आपत्ति जताएंगे और इसीलिए वहां ‘जय भीम’ के नारे भी लगाए गए. विरोध प्रदर्शन के दौरान मुझ पर हमला हुआ और मैंने FIR दर्ज कराई, लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस का काम गुंडों और अपराधियों को बचाना और पीड़ित को कमजोर करना है.
ये भी पढ़ें
सोनिया गांधी की किताब को अब ये कंपनी करेगी पब्लिश, विवाद के बीच ऐलान
