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छात्रों पर पुलिसकर्मियों का एक्शन ‘व्यथित करने वाला’, जंतर-मंतर की घटना पर बोले जस्टिस भुइयां


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने शुक्रवार (4 सितंबर 2026) को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों की कार्रवाई परेशान करने वाली और चिंता का विषय है. पूर्व आईपीएस अधिकारी और सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की किताब ‘पॉलिसिंग द रिपब्लिक’ के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने ये बातें कही. उन्होंने कहा कि पुलिस से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है.

पुलिस एक्शन को लेकर क्या बोले जस्टिस भुइयां

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब हम भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों को खुद जाकर प्रदर्शनकारियों और प्रदर्शनकारी छात्रों से मारपीट करते देखते हैं तो हम सभी को बहुत निराशा होती है. यह देखना बहुत ही दुखद है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘पुलिस अधिकारियों से जिस निष्पक्षता और तटस्थता की उम्मीद की जाती है, वह कहीं न कहीं खत्म होती दिख रही है और यह वाकई चिंताजनक स्थिति है.’ जस्टिस भुइयां की ये टिप्पणी के बाद देश में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों को लेकर चल रही बहस के बीच आई है.

प्रदर्शनकारियों और छात्रों के अधिकारों को लेकर जस्टिस भुइयां की ये पहली टिप्पणी नहीं है, बल्कि वह हाल के दिनों में इस विषय पर कई बार बोल चुके हैं. इससे पहले 25 जुलाई को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि अलग-अलग विचारों के लिए सार्वजनिक जगहें सिमटती जा रही हैं.

छात्रों के अधिकारों पर पहले भी कर चुके हैं टिप्पणी

इसके बाद, 30 अगस्त को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) के दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा था कि सवाल पूछने का अधिकार कोई बगावत या अवहेलना नहीं है, बल्कि यह नागरिकता, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी की एक जरूरी अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा था कि छात्रों को केवल अलग राय रखने या सवाल पूछने के लिए दंडात्मक कार्रवाई की धमकी नहीं दी जा सकती. उन्होंने ऐसी दंडात्मक कार्रवाई को असंवैधानिक, पद और शक्तियों का दुरुपयोग बताया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से जुड़ी देश भर की सभी एफआईआर को रद्द करने का फैसला सुनाया था. यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा. कोर्ट ने ये भी कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है उन पर केस चलता रहेगा.



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