बिहार की राजधानी पटना में बाढ़ ने निचले और दियारा इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मरीन ड्राइव के पास बिंद टोली के करीब 1500 लोग बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन के राहत इंतजामों के दावे जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं. घरों में पानी घुसने के बाद लोग खुद टेंट और त्रिपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं.
बिंद टोली के लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी उनके घरों में घुस गया है. रहने की जगह नहीं बची तो उन्होंने खुद मरीन ड्राइव के पास टेंट और त्रिपाल लगाए हैं. प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें प्रशासन की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है और कोई अधिकारी उनका हाल जानने तक नहीं पहुंचा.
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‘खाना-पानी खत्म, पशुओं का चारा भी नहीं’
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उनके पास खाना और पीने का पानी तक खत्म हो चुका है. पशुओं के लिए चारा भी नहीं बचा है. लोगों का आरोप है कि उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. उनका सवाल है कि जब राहत शिविरों में भोजन, रहने और पशुओं के चारे की व्यवस्था की गई है तो उन्हें वहां क्यों नहीं ले जाया जा रहा?
‘राहत शिविर सिर्फ नाम के’
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राहत शिविर चलाए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जरूरतमंदों तक इसका लाभ नहीं पहुंच रहा. उनका कहना है कि बाढ़ के बीच परिवारों और पशुओं को लेकर खुले में रहना पड़ रहा है. लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है.
प्रशासन का दावा- 9 प्रखंड प्रभावित
पटना जिले में बाढ़ से 9 प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी प्रभावित बताई जा रही है. जिला प्रशासन का दावा है कि बाढ़ पीड़ितों के लिए 8 सामुदायिक किचन शुरू किए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन कराया जा रहा है. राहत शिविरों में भोजन, पानी, रहने और पशुओं के चारे की व्यवस्था का भी दावा किया गया है. अब सवाल यह है कि प्रशासन के इन दावों का लाभ बिंद टोली जैसे प्रभावित इलाकों तक कब पहुंचता है?
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