फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 की 4 अगस्त की घटना को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है. रिपोर्ट में उड़ान से जुड़े दो बेहद अहम और अलग-अलग पहलू सामने आए हैं. पहला, दिल्ली पहुंचने के बाद फ्लाइट के कमांडर का साइको-एक्टिव पदार्थों का टेस्ट नॉन-निगेटिव आया और पुष्टि के लिए किए गए ब्लड टेस्ट में भी यही परिणाम रहा.
दूसरा, उड़ान के दौरान करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम एक के बाद एक फेल हो गए. इसी दौरान ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हुआ, स्टॉल वॉर्निंग आई और विमान कुछ ही सेकंड में अपनी तय ऊंचाई से सैकड़ों फीट ऊपर-नीचे हुआ. इस झटके में 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू समेत कुल 24 लोग घायल हुए. हालांकि, AAIB की रिपोर्ट इन दोनों घटनाओं को आपस में जोड़कर कोई निष्कर्ष नहीं देती है. जांच अभी जारी है.
पहले जानिए- विमान में कितने लोग सवार थे
AI-2379 एयरबस A320-251N विमान था. इसका रजिस्ट्रेशन VT-EXO था और विमान का निर्माण वर्ष 2018 में हुआ था. विमान में कुल 145 लोग सवार थे. इनमें 137 यात्री शामिल थे, जिनमें तीन शिशु भी थे. इसके अलावा छह केबिन क्रू और दो पायलट विमान में मौजूद थे. फ्लाइट के कमांडर की उम्र 34 साल थी. उनके पास ATPL लाइसेंस था और उनके पास करीब 5,055 घंटे का उड़ान अनुभव था. वहीं 32 वर्षीय को-पायलट के पास CPL लाइसेंस था और उनका उड़ान अनुभव करीब 1,393 घंटे था. दोनों पायलटों ने उड़ान से पहले करीब 22 घंटे आराम किया था. पिछले 24 घंटे के दौरान उन्होंने कोई दूसरी उड़ान नहीं भरी थी.
फुकेत से उड़ान सामान्य थी, फिर 36 हजार फीट पर बदले हालात
विमान ने 4 अगस्त की सुबह 01:41 UTC पर फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरी. शुरुआत में उड़ान सामान्य रही और किसी बड़ी तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी दर्ज नहीं हुई. 03:40 UTC पर विमान कोलकाता फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन में दाखिल हुआ और कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी ATC से संपर्क किया. ATC ने विमान को 34 हजार फीट से बढ़ाकर 36 हजार फीट की ऊंचाई पर जाने का निर्देश दिया. क्रू ने निर्देश का पालन किया. इसके करीब कुछ समय बाद विमान में अचानक ऐसी तकनीकी स्थिति बनी, जिसने पूरी उड़ान की दिशा बदल दी.
वो 9 सेकंड, जब विमान में मचा हड़कंप
AAIB की रिपोर्ट में घटना के सेकंड-दर-सेकंड घटनाक्रम का भी उल्लेख है.
04:02:43 UTC: फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने सबसे पहले ग्रीन हाइड्रॉलिक सिस्टम में दबाव खत्म होने की जानकारी दी.
04:02:47 UTC: केवल चार सेकंड बाद ब्लू और येलो हाइड्रॉलिक सिस्टम भी फेल हो गए. यानी विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम ने लगभग एक साथ काम करना बंद कर दिया.
04:02:48 UTC: ऑटोपायलट अपने आप डिस्कनेक्ट हो गया और कॉकपिट में लगातार चेतावनियां बजने लगीं.
04:02:51 UTC: करीब दो सेकंड के लिए स्टॉल वॉर्निंग भी सक्रिय हुई. उस समय विमान को-पायलट उड़ा रहे थे, जबकि कमांडर निगरानी कर रहे थे.
को-पायलट ने स्थिति संभालने की कोशिश की. इसके बाद कमांडर ने विमान का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया. इसी दौरान विमान अपनी तय ऊंचाई से करीब 372 फीट ऊपर गया और फिर 292 फीट नीचे आया. यानी कुछ ही सेकंड में विमान की ऊंचाई में तेजी से बदलाव हुआ.
कुछ सेकंड बाद हाइड्रॉलिक सिस्टम फिर बहाल
स्थिति गंभीर थी, लेकिन राहत की बात यह रही कि 04:02:52 UTC पर ब्लू हाइड्रॉलिक सिस्टम अपने आप दोबारा काम करने लगा. इसके कुछ ही सेकंड बाद येलो और ग्रीन हाइड्रॉलिक सिस्टम भी बहाल हो गए. हाइड्रॉलिक सिस्टम के दोबारा काम करने के बाद विमान की कंट्रोल सतहें भी सामान्य तरीके से काम करने लगीं. पायलटों ने विमान को संभाल लिया और उड़ान जारी रखी.
यात्रियों को कैसे लगी चोट?
घटना के समय विमान क्रूज में था और सीट बेल्ट का साइन बंद था. इसके कारण कुछ यात्री अपनी सीटों से बाहर थे, जबकि कुछ लोग बिना सीट बेल्ट के बैठे हुए थे. विमान के अचानक ऊपर-नीचे होने से यात्री और केबिन क्रू उछल गए. इसी वजह से कुल 24 लोग घायल हुए, जिनमें 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य थे. इनमें 20 लोगों को मामूली चोटों के इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.
अब आते हैं कमांडर के साइको-एक्टिव टेस्ट पर
दिल्ली में विमान के सुरक्षित उतरने के बाद दोनों पायलटों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया गया. विदेश से आने वाली उड़ानों के लिए यह जांच जरूरी होती है. दोनों पायलटों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट संतोषजनक रहा. इसके बाद साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच की गई. इसमें कमांडर का सैंपल नॉन-निगेटिव पाया गया. पुष्टि के लिए दोनों पायलटों के ब्लड सैंपल पैथोलॉजी लैब भेजे गए. कमांडर की कन्फर्मेटरी रिपोर्ट भी नॉन-निगेटिव रही, जबकि को-पायलट का सैंपल दोनों जांचों में निगेटिव आया.
यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट यह नहीं कहती कि कमांडर ने विमान उड़ाते समय गांजा या कोई अन्य पदार्थ लिया था अथवा वह नशे के असर में थे. रिपोर्ट में केवल जांच के परिणाम दर्ज किए गए हैं. किस साइको-एक्टिव पदार्थ की पुष्टि हुई, इसका उल्लेख AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में नहीं किया गया है.
इसलिए कमांडर के टेस्ट को लेकर सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन इसे सीधे विमान में आई तकनीकी गड़बड़ी का कारण बताना फिलहाल सही नहीं होगा. AAIB ने मामले को गंभीर चिंता का विषय माना है और DGCA से साइको-एक्टिव पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश की है.
हाइड्रॉलिक सिस्टम आखिर करता क्या है?
इस घटना को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि विमान का हाइड्रॉलिक सिस्टम कितना महत्वपूर्ण होता है. A320 विमान में तीन अलग-अलग हाइड्रॉलिक सिस्टम होते हैं- ग्रीन, ब्लू और येलो. इनकी मदद से विमान के कई अहम हिस्से संचालित होते हैं. इनमें फ्लाइट कंट्रोल सरफेस, लैंडिंग गियर और ब्रेक जैसी प्रणालियां शामिल हैं.
तीनों सिस्टम को अलग-अलग रखा जाता है ताकि किसी एक सिस्टम में खराबी आने पर बाकी सिस्टम विमान को नियंत्रित रखने में मदद कर सकें. ग्रीन सिस्टम को बाएं इंजन का पंप, येलो सिस्टम को दाएं इंजन का पंप और ब्लू सिस्टम को इलेक्ट्रिक पंप सपोर्ट करता है. ऐसे में तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम का एक साथ प्रभावित होना सामान्य स्थिति नहीं है. यही अब इस घटना की जांच का सबसे बड़ा तकनीकी सवाल है.
MEL और PTU का क्या है कनेक्शन?
रिपोर्ट में एक और अहम तकनीकी पहलू सामने आया है. फुकेत से उड़ान भरने से पहले विमान की जांच की गई थी. उस समय पहले से लगी एक MEL छूट के अलावा कोई दूसरी खराबी नहीं मिली थी. यह MEL आइटम PTU यानी Power Transfer Unit से जुड़ा था और इसे 28 जुलाई को लगाया गया था, यानी घटना से करीब सात दिन पहले. MEL यानी Minimum Equipment List एक स्वीकृत सूची होती है. इसमें बताया जाता है कि किसी उपकरण के खराब होने की स्थिति में किन शर्तों के साथ विमान कुछ समय तक उड़ान भर सकता है.
PTU को आसान भाषा में हाइड्रॉलिक सिस्टम के एक बैकअप मैकेनिज्म के तौर पर समझा जा सकता है. जब ग्रीन और येलो हाइड्रॉलिक सिस्टम के बीच दबाव का अंतर बढ़ता है तो PTU कमजोर सिस्टम को दबाव उपलब्ध कराने में मदद करता है. हालांकि, AAIB ने अभी यह नहीं कहा है कि PTU की MEL छूट ही घटना की वजह थी. लेकिन विमान उसी छूट के साथ उड़ान पर था और उसी उड़ान के दौरान तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम प्रभावित हुए, इसलिए जांच में इस पहलू को भी देखा जा रहा है.
दिल्ली पहुंचने के बाद विमान की जांच में क्या मिला?
दिल्ली पहुंचने के बाद मेंटेनेंस टीम ने विमान की पोस्ट-फ्लाइट रिपोर्ट तैयार की. इसमें सबसे पहले ग्रीन हाइड्रॉलिक सिस्टम के कम दबाव की चेतावनी दर्ज हुई. इसके बाद ब्लू और येलो सिस्टम से जुड़ी चेतावनियां भी दर्ज की गईं. इसके अलावा ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने, दोनों एलिवेटर में फॉल्ट और ब्लू-येलो टैंक में कम स्तर जैसी बातें भी सामने आईं. यानी विमान के डेटा और पोस्ट-फ्लाइट जांच दोनों में हाइड्रॉलिक सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ी दर्ज हुई.
बाहर से विमान सुरक्षित, लेकिन केबिन के अंदर हुआ नुकसान
बाहर से विमान को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन केबिन के अंदर कई जगह टूट-फूट मिली. पांचवीं से 29वीं रो तक कई जगह छत के पैनल टूटे और मुड़े हुए मिले. कई पैसेंजर सर्विस यूनिट पैनल अपनी जगह से खिसक गए थे. कुछ हैंडरेल भी टूटे मिले. दो जगह ऊपर सामान रखने वाले बिन के दरवाजे अपने कब्जे से निकल गए. विमान के आगे की तरफ दाईं ओर वाले इमरजेंसी एग्जिट का हैंडल भी टूटा हुआ मिला. एक लैवेटरी का कमोड अपनी जगह से उखड़ गया था. इसके अलावा एक क्रू सीट मुड़ी मिली, जबकि दूसरी क्रू सीट का हेडरेस्ट भी निकल गया था.
क्या खराब मौसम की वजह से हुआ था हादसा?
घटना के शुरुआती दौर में इसे टर्बुलेंस से जोड़कर देखा गया था. हालांकि AAIB की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के समय पायलटों या ATC की ओर से खराब मौसम की कोई सूचना नहीं दी गई थी. भुवनेश्वर के लिए जारी मौसम पूर्वानुमान में हल्की गरज-चमक और बारिश की संभावना जरूर थी, लेकिन रिपोर्ट ने इसे घटना की वजह नहीं बताया है. ऐसे में फिलहाल इसे केवल सामान्य टर्बुलेंस की घटना मानना उचित नहीं होगा.
AAIB को घटना की जानकारी कैसे मिली?
AAIB को इस घटना की जानकारी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ऑपरेशनल कंट्रोल रूम से मिली थी. शुरुआत में इसे टर्बुलेंस की घटना बताया गया था. लेकिन जब विमान की तकनीकी स्थिति और यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई तो मामले को दुर्घटना की श्रेणी में रखा गया. इसके बाद Aircraft Rules 2025 के तहत औपचारिक जांच शुरू की गई.
जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?
विमान का कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर निकालकर AAIB मुख्यालय लाया गया. दोनों का डेटा डाउनलोड किया जा चुका है. विमान फ्रांस में बना है, इसलिए ICAO नियमों के तहत फ्रांस की जांच एजेंसी BEA को भी घटना की जानकारी दी गई. BEA के प्रतिनिधि और एयरबस के तकनीकी विशेषज्ञ भारत पहुंचे.
13 से 15 अगस्त के बीच विमान की तकनीकी जांच की गई. हाइड्रॉलिक सिस्टम के कुछ पुर्जे और तेल के सैंपल जांच के लिए लिए गए. इसके अलावा विमान से ईंधन और तेल के नमूने भी लिए गए. एयरलाइन से मेंटेनेंस और ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए हैं. दिल्ली और कोलकाता ATC से भी डेटा लिया गया है. पायलटों, केबिन क्रू, एयरलाइन, एयरपोर्ट ऑपरेटर और मेडिकल टीम से पूछताछ की गई है.
अब जांच के सामने दो बड़े सवाल
AI-2379 की घटना में फिलहाल दो बड़े सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं. पहला, 36 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम एक साथ क्यों फेल हुए? दूसरा, कमांडर के साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच में आए नॉन-निगेटिव परिणाम का उड़ान के दौरान हुई घटना से कोई संबंध था या नहीं?
इन दोनों सवालों का जवाब अभी नहीं मिला है. AAIB की यह प्रारंभिक रिपोर्ट है, इसलिए जांच पूरी नहीं हुई है और आगे मिलने वाली जानकारी के आधार पर निष्कर्ष बदल सकते हैं. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI-2379 की उड़ान में एक तरफ कमांडर के साइको-एक्टिव पदार्थों के टेस्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ हवा में तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम का एक साथ फेल होना बड़ी तकनीकी घटना थी. इन दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध था या नहीं, इसका अंतिम जवाब AAIB की विस्तृत जांच और अंतिम रिपोर्ट से ही सामने आएगा.
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