Headlines

जिनपिंग के आने से पहले सख्त भारत, बॉर्डर पर अल्टीमेटम- ‘बर्दाश्त नहीं करेंगे…’


अरुणाचल प्रदेश में चीन के सैनिकों की कथित घुसपैठ की हरकतों वाली खबरों के बीच भारत ने बीजिंग को कड़ी चेतावनी दे दी है. नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि चीनी सेना की ऐसी हरकतें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं. साथ ही चेताया है कि भविष्य में इस तरह की हरकतें दोबारा नहीं होनी चाहिए.

अरुणाचल प्रदेश में रविवार (6 अक्टूबर) को दोनों देशों के टॉप सैन्य कमांडरों की बैठक हुई, जिसमें पूर्वी क्षेत्र में LAC से जुड़े अलग-अलग कई मुद्दों पर चर्चा हुई. 

वाचा-दमाई मीटिंग प्वाइंट पर बैठक 
भारत की तरफ वाचा-दमाई मीटिंग प्वाइंट पर ये बातचीत हुई. भारत की तरफ से भारतीय सेना की तीसरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने बैठक का नेतृत्व किया. चीन की ओर से भी समान रैंक के अधिकारी शामिल हुए. एनएसए अजीत डोभाल की पिछले माह बीजिंग यात्रा के बाद सैन्य कमांडरों की यह बैठक अहम मानी जा रही है. 

शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना
बता दें कि पूर्वी क्षेत्र के कमांडरों की यह पहली बैठक थी. भारत ने चीन को लेकर ये सख्त रुख ऐसे समय में दिखाया है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सप्ताह ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने की संभावना है. बीते सप्ताह एक कार्यक्रम में पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि पड़ोसी देश के साथ सीमा विवाद अब भी सुलझा नहीं है और वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को लेकर भी पूरी तरह परस्पर सहमति नहीं है.

पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बयान
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता. पूर्व सीडीएस ने कहा कि सीमा का मुद्दा अब भी सुलझा नहीं है और यहां तक कि एलएसी की कोई पारस्परिक रूप से सहमत परिभाषा भी नहीं है. चीन और भारत एशिया की 2 प्रमुख शक्तियां, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्राचीन सभ्यताओं वाले देश हैं. दोनों देशों के संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता. 

ये भी पढ़ें

RSS का काम नफरत नहीं ‘शुद्ध सात्विक प्रेम फैलाना…’, लंदन में बोले मोहन भागवत



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *