आपको बता दें कि मेजर नव्या शेखावत मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के केरपुरा गांव की रहने वाली है. 2026 में राष्ट्रपति की एडीसी नियुक्त होने के बाद राष्ट्रपति भवन में अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और जुलाई से इस पद पर कार्यरत बताई जा रही है.

मेजर नव्या शेखावत ने भारतीय सेना में प्रवेश के लिए यूपीएससी की कंबाइंड डिफेंस सर्विस परीक्षा दी थी. उन्होंने सीडीएस (1) 2020 की ऑफिशियल मेरिट लिस्ट में ऑफिसर ट्रेंनिंग अकेडमी चेन्नई शॉर्ट सर्विस कमीशन वूमेन नॉन टेक्निकल कोर्स में जगह बनाई. इसके बाद उन्होंने ओटीए चेन्नई में ट्रेनिंग पूरी की और करीब 2021 के मध्य में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया.

उनकी नियुक्ति आर्मी सर्विस कॉप्स में हुई है. यह काॅप्स सेना के लिए सप्लाई, परिवहन, लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल सपोर्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालता है. सेना में कमीशन मिलने के कुछ वर्षों के अंदर ही वह मेजर के पद पर पहुंची. करीब 5 साल की सेवा के बाद उन्हें राष्ट्रपति की एडीसी जैसी प्रतिष्ठित जिम्मेदारी लिए चुना गया.

राष्ट्रपति के एडीसी का काम केवल औपचारिक कार्यक्रमों के साथ रहना नहीं होता. वह अधिकारी राष्ट्रपति के अधिकारिक कार्यक्रमों, राज्य समारोहों, राजनायिक गतिविधियों और दूसरे जरूरी आयोजनों में उनके साथ रहते हैं

इस जिम्मेदारी में सैन्य और संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन विभिन्न कार्यक्रमों के बीच समन्वय और राष्ट्रपति भवन तथा संबंधित कार्यकारी एवं सैन्य संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना शामिल होता है. इसके लिए अधिकारी के अनुशासन, गोपनीयता और सटीक समन्वयी की अपेक्षा की जाती है. वहीं राष्ट्रपति के साथ परंपरागत रूप से पांच एडीसी होते हैं, इनमें तीन सेना, एक नौसेना और एक वायु सेना से होते हैं.

मेजर नव्या शेखाचत राष्ट्रपति की एसीडी बनने वाली पहली महिला आर्मी अधिकारी है. लेकिन वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली नहीं है. इससे पहले भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी मई 2025 में राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी बनी थी. इस तरह नव्या शेखावत इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला और भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी हैं.

मेजर नव्या की उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं के बढ़ते अवसरों की कहानी का भी हिस्सा मानी जा रही है. भारतीय सेना में महिल अधिकारी के तौर पर भर्ती 1992 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए शुरू हुई थी. इसके बाद नीतिगत बदलाव और न्यायिक फैसलों के जरिए उनके लिए करियर के रास्ते लगातार खुलते गए.

2020 में सुप्रीम कोर्ट के बबीता पूनिया मामले में दिए गए फैसले में पात्र महिला अधिकारियों के लिए पुरुष अधिकारियों के समान शर्तों पर परमानेंट कमिशन के अवसर को मजबूत किया. इसके बाद सेना की अलग-अलग शाखों में महिलाओं के लिए आगे बढ़ने की संभावनाएं और खुल गई.
Published at : 12 Sep 2026 10:05 AM (IST)
