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राजस्थान निकाय चुनाव: नतीजों से पहले प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी, बस में जाते दिखे


राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के लिए वोटिंग हो चुकी है. 14 सितंबर को वार्डों के नतीजे आएंगे. इसके बाद निर्वाचित पार्षद मेयर और चेयरमैन चुनेंगे. पार्षदों के नतीजे घोषित होने से पहले ही पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है.

इस काम में बीजेपी सबसे आगे हैं. वह अपने प्रत्याशियों को सैकड़ो किलोमीटर दूर होटल और रिसॉर्ट में लोगों की भीड़ से दूर कथित तौर पर कैद कर रही है. हालांकि बीजेपी पदाधिकारियों और बस से भेजे जा रहे प्रत्याशियों का दावा है कि वह पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों के लिए अज्ञात जगह पर ले जाए जा रहे हैं. 

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प्रत्याशियों के बाड़ेबंदी पर कांग्रेस ने क्या कहा?

खास बात यह है कि प्रत्याशियों के साथ उनके परिवार का कोई सदस्य भी नहीं भेजा जा रहा है. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वह भी अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी पर गंभीरता से विचार कर रही है. जयपुर शहर में विद्याश्रम स्कूल के बाहर खड़ी इन लग्जरियस बसों के जरिए ही जयपुर नगर निगम के डेढ़ सौ वार्डों के प्रत्याशियों को किसी अज्ञात जगह पर भेजा जा रहा था. 

इन्हें एक रिसोर्ट में ठहराए जाने का कार्यक्रम है. प्रत्याशी जब बस में बिठाए जा रहे थे, तभी एबीपी न्यूज़ की टीम वहां पहुंच गई. बस पर आगे की तरफ उन विधानसभा सीटों के नाम लिखे हुए थे, जहां के वार्डों के प्रत्याशियों को अलग-अलग बस में बिठाया जाना था. इस बीच बीजेपी के जिला अध्यक्ष अमित गोयल भी वहां मौजूद थे. 

मामले पर क्या बोली बीजेपी?

बीजेपी जिला अध्यक्ष अमित गोयल के मुताबिक इन प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी नहीं की गई है, बल्कि इन्हें प्रशिक्षण के लिए किसी खास जगह भेजा जा रहा है. हालांकि मतदान के अगले ही दिन इनका प्रशिक्षण बाहर क्यों कराया जा रहा है, इसका कोई जवाब उनके पास नहीं था. हमने बस में बिठाए गए पार्षद प्रत्याशियों से भी बातचीत की. पार्टी के पदाधिकारी सामने खड़े हुए थे, लिहाजा उन्होंने भी ट्रेनिंग कैंप वाली रटाई गई कहानी ही सुनाई. 

जानकारी के मुताबिक बीजेपी सिर्फ जयपुर नगर निगम के प्रत्याशियों को ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में तमाम प्रमुख निकायों के प्रत्याशियों को इसी तरह से एक से दूसरी जगह पर भेज रही है. प्रत्याशियों को अकेले ही भेजा जा रहा है.

परिवार वालों से बातचीत के लिए खास समय भी निर्धारित किया गया है. इन्हें अब 22 और 23 सितंबर को उस वक्त बस से ही लाया जाएगा, जब मेयर और चेयरमैन के चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. दरअसल पार्टी को इस बात का डर है कि कांग्रेस या कोई अन्य इनकी खरीद फरोख्त ना कर ले, या फिर यह क्रॉस वोटिंग ना कर सके. 

अंदरखाने कांग्रेस भी कर रही बाड़ेबंदी

वैसे यह कहानी अकेले बीजेपी की नहीं है. अंदरखाने कांग्रेस भी कई जगहों पर यह काम कर रही है. जयपुर में भी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कैमरे पर यह कबूल किया है कि वह भी इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. इसके लिए कल सुबह बड़े नेताओं की एक बैठक बुलाई गई है. 

हालांकि उन्होंने यह धमकी भी दी है कि अगर बीजेपी ने उनके पार्षदों के साथ जोड़ तोड़ की कोशिश की तो उसके गंभीर नतीजे होंगे. राजस्थान में अब इस तरह की बाड़ेबंदी और उससे जुड़े विवाद मेयर व चेयरमैन के चुनाव होने तक सामने आते रहेंगे. हालांकि एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या पार्टियों को अपने उम्मीदवारों पर भरोसा नहीं रह गया है, जो इस तरह से उनकी बाड़े बंदी की जा रही है.

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