16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि दक्षिण भारत के पांच राज्यों (तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल) की लोकसभा सीटों में करीब 50% से ज्यादा बढ़ोतरी होगी. कोई राज्य नुकसान में नहीं आएगा. उन्होंने कहा कि ‘दक्षिण के खिलाफ कोई साजिश नहीं है, बल्कि हर राज्य को समानुपातिक बढ़ोतरी मिलेगी.’ यह बयान उन तमाम अटकलों पर विराम लगा रहा है जिनमें कहा जा रहा था कि नए परिसीमन से दक्षिण की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी.
अभी दक्षिण भारत की कितनी सीटें हैं और नए परिसीमन के बाद कितनी होंगी?
लोकसभा की कुल 543 सीटों में दक्षिण के पांच राज्यों की कुल 129 सीटें हैं, जो 23.76% हैं. नए परिसीमन के बाद लोकसभा में कुल 816 सीटें हो जाएंगी और दक्षिण भारत की कुल 195 सीटें (23.90%) होंगी. यह बढ़ोतरी हर राज्य को अलग-अलग दी गई है:
- तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 (सबसे ज्यादा फायदा, सदन में शेयर 7.23%)
- कर्नाटक: 28 से बढ़कर 42 सीटें
- आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 38 सीटें
- तेलंगाना: 17 से बढ़कर 26 सीटें
- केरल: 20 से बढ़कर 30 सीटें
यानी सभी राज्यों में 50% सीटें बढ़ जाएंगी.
यह 50% बढ़ोतरी का फॉर्मूला क्या है और क्यों अपनाया गया?
सरकार का कहना है कि हर राज्य को अपनी मौजूदा सीटों पर करीब 50% अतिरिक्त सीटें मिलेंगी, ताकि सदन में उनका प्रतिशत शेयर बिल्कुल वही या थोड़ा बढ़ा रहे. अमित शाह ने उदाहरण देते हुए कहा:
- कर्नाटक का शेयर 5.15% से 5.14% (लगभग बराबर)
- आंध्र प्रदेश 4.60% से 4.65%
- तेलंगाना 3.13% से 3.18%
- तमिलनाडु 7.18% से 7.23%
इस फॉर्मूले का मकसद है कि परिवार नियोजन करने वाले दक्षिणी राज्यों को सजा न मिले और जनसंख्या बढ़ने वाले जवाब भारत को भी न्याय मिले. कुल सीटें बढ़ाकर 816 करने का कारण भी साफ है, यानी 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए बिना किसी पुरुष सांसद की सीट घटाए आरक्षण दिया जा सके.
क्या दक्षिण की चिंताएं पूरी तरह गलत हैं?
अमित शाह ने कहा कि ‘दक्षिण की शक्ति बढ़ेगी, न कि घटेगी.’ लेकिन कांग्रेस, DMK और TDP जैसी विपक्षी पार्टियां अभी भी सतर्क है. उनका कहना है कि बिल के ड्राफ्ट में ‘50% बढ़ोतरी’ का फॉर्मूला लिखा नहीं है. यह सिर्फ अमित शाह का आश्वासन है. अगर बाद में शुद्ध जनगणना आधार पर परिसीमन हुआ तो प्रतिशत बदल सकता है.
आम आदमी और राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा?
- फायदा: दक्षिण भारत के पास 66 अतिरिक्त सांसद होंगे. दिल्ली में उनकी आवाज और मजबूत होगी. महिला आरक्षण भी बिना किसी की सीट घटाए लागू होगा.
- राजनीतिक समीकरण: 2029 के चुनाव में दक्षिण की पार्टियां ज्यादा सीटें जीत सकती हैं. NDA और INDIA गठबंधन दोनों को फायदा.
- संघीय भावना: उत्तर-दक्षिण विवाद थम सकता है, लेकिन अगर परिसीमन आयोग बाद में अलग फैसला ले तो फिर बहस छिड़ सकती है.
संसद के विशेष सत्र में तीनों बिल पास हो गए तो परिसीमन आयोग बनेगा. नई सीटें और महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होंगे.
