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PUC बनवाने जा रहे हैं तो जान लें ये गाइडलाइन, सरकार का सख्त आदेश


दिल्ली-NCR में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए PUC यानी Pollution Under Control सर्टिफिकेट की जांच व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है. अब PUC सेंटर पर सिर्फ प्रदूषण जांच मशीनों के भरोसे व्यवस्था नहीं चलेगी, बल्कि सेंटर की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी. इसके लिए दिल्ली सरकार की ओर से PUC सेंटर पर सर्विलांस कैमरे लगाने को अनिवार्य किया जा रहा है. 

निगरानी बढ़ाने की तैयारी

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए गाड़ियों की फिटनेस और उनसे निकलने वाले धुएं की जांच काफी जरूरी है. PUC सर्टिफिकेट इसी बात का प्रमाण होता है कि गाड़ी से निकलने वाला प्रदूषण तय मानकों के भीतर है. लेकिन अगर बिना सही जांच के PUC सर्टिफिकेट जारी हो जाए, तो प्रदूषण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है. इसी समस्या को देखते हुए PUC सेंटरों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.
  • नई व्यवस्था में सर्विलांस कैमरों की मदद से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सेंटर पर आने वाले वाहन की वास्तव में जांच हुई है या नहीं. इससे सेंटर संचालकों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर जांच के दौरान रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकेगा.

कैमरे लगने से क्या बदलेगा?

  • PUC सेंटर पर कैमरा लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी वाहन का PUC सर्टिफिकेट जारी किया जाता है तो निगरानी व्यवस्था के जरिए यह देखा जा सकेगा कि वाहन सेंटर पर आया था या नहीं और जांच प्रक्रिया वास्तव में हुई थी या नहीं.
  • इससे ऐसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है, जहां वाहन को सेंटर पर लाए बिना ही PUC सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है. इसी तरह प्रदूषण जांच में किसी तरह की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित सेंटर की गतिविधियों की जांच करना भी आसान हो सकता है.

  • कई बार गाड़ी मालिकों के लिए PUC सर्टिफिकेट सिर्फ एक जरूरी दस्तावेज बनकर रह जाता है. ऐसे में कुछ मामलों में वास्तविक प्रदूषण जांच के बजाय केवल सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायतें सामने आती रही हैं. अगर सेंटर पर कैमरों के जरिए निगरानी होती है, तो इस तरह की गड़बड़ियों को पकड़ना आसान हो सकता है.
  • नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ PUC सेंटर संचालकों पर नजर रखना नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को ज्यादा भरोसेमंद बनाना है. अगर किसी वाहन का प्रदूषण तय सीमा से ज्यादा है, तो उसे सही तरीके से जांच में फेल किया जाना चाहिए और वाहन मालिक को समस्या ठीक कराने के बाद दोबारा जांच करानी चाहिए.

वाहन मालिकों के लिए क्या होगा असर?

  • गाड़ी मालिकों के लिए इस बदलाव का सीधा मतलब यह है कि PUC बनवाते समय प्रदूषण जांच कराना जरूरी होगा. केवल औपचारिकता पूरी करके सर्टिफिकेट हासिल करना पहले के मुकाबले मुश्किल हो सकता है. इसलिए अगर वाहन से ज्यादा धुआं निकल रहा है या प्रदूषण स्तर तय सीमा से अधिक है, तो पहले वाहन की समस्या ठीक कराना बेहतर होगा.

PUC बनवाने जा रहे हैं तो जान लें ये गाइडलाइन, सरकार का सख्त आदेश

  • खासकर पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए नियमित प्रदूषण जांच ज्यादा महत्वपूर्ण है. वाहन की सर्विसिंग, इंजन की सही स्थिति और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपकरण ठीक होने पर ही वाहन निर्धारित मानकों के भीतर रह सकता है.

सेंटर संचालकों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

  • सर्विलांस कैमरों की अनिवार्यता से PUC सेंटर संचालकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सेंटर पर नियमों के मुताबिक ही प्रदूषण जांच की जाए और उसी आधार पर सर्टिफिकेट जारी किया जाए. अगर किसी सेंटर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो निगरानी रिकॉर्ड जांच में मददगार हो सकता है.
  • इस व्यवस्था से सेंटर के बीच होने वाली गलत प्रतिस्पर्धा पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है. यानी जो सेंटर नियमों के मुताबिक सही जांच कर रहे हैं, उन्हें ऐसे सेंटरों से नुकसान नहीं होगा जो बिना उचित जांच के सर्टिफिकेट जारी करते हैं.
  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण कई स्रोतों से होता है और वाहनों का उत्सर्जन भी इसमें एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऐसे में केवल सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच करना ही पर्याप्त नहीं है. जिस व्यवस्था के जरिए वाहनों को PUC सर्टिफिकेट दिया जाता है, उसका सही तरीके से काम करना भी जरूरी है.

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