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UCC पर अमित शाह के बयान से सियासी हंगामा, किस राज्य में क्या है स्थिति?


केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को यूसीसी पर जो बयान दिया था, अब उसपर सियासी हंगामा बढ़ता नजर आ रहा है. AIMIM के चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी से लेकर कांग्रेस समेत जेडीयू के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है. केंद्रीय मंत्री ने 13 सितंबर को 21 एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने का ऐलान किया है.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत कर कहा है, ‘केंद्र सरकार की पिछले 12 सालों की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की 25 साल की यात्रा उल्लेखनीय है.’

शाह ने कहा, ‘तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं. हमने कई राज्यों में यूसीसी लागू की है. मुझे विश्वास है कि NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा. बता दें, लोकसभा चुनाव साल 2029 में होना है.’  

बीजेपी समानता के लिए यूसीसी नहीं ला रही: ओवैसी

इसपर तेलंगाना के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि सबसे पहले आपको समझना होगा कि बीजेपी समानता के लिए यूसीसी नहीं ला रही है. उन्होंने अपने राज्यों और सरकारी स्तर पर यूसीसी सिर्फ भारत के 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए लागू किया है. ऐसा करके बीजेपी और अमित शाह भारतीय संविधान के आर्टिकल 25 (धर्म की स्वतंत्रता), 14 (समानता का अधिकार), 26 और 29 का उल्लंघन कर रहे हैं. इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि BJP का यह कदम समानता के बारे में नहीं है.

ओवैसी ने आगे कहा, ‘यह पूरी तरह से मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए है. इस देश की आत्मा और भावना अनेकतावादी है. तीसरी बात अमित शाह, BJP और RSS गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश कर रहे हैं. चौथी बात खुद मोदी सरकार की तरफ से गठित लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि UCC भारत के लिए न तो जरूरी है और न ही वांछनीय.

इसके अलावा ओवैसी ने कहा, पांचवी बात मैं पूछना चाहता हूं. आपके राज्यों में ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट’ (अशांत क्षेत्र कानून) क्यों है, जो किसी हिंदू को अपनी संपत्ति मुसलमान को बेचने से रोकता है? और ‘लव जिहाद’ को लेकर आपके यहां कानून क्यों हैं? ये वे बातें हैं जिन्हें आपको समझने की जरूरत है. इसके अलावा गोवा में चुनाव होने वाले हैं. मैं अमित शाह, बीजेपी और आरएसएश को चुनौती देता हूं, आगे बढ़िए और वहां यूसीसी लागू करके दिखाइए. 

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान?
इस मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, ‘यूसीसी लागू हो या न हो उनमें कोई फर्क नहीं है. यह संप्रदाय का देश है और लोग अपने संप्रदाय को मानेंगे. यह केवल वोट बैंक के लिए है. आपकी छात्रवृत्ति पर बात नहीं होगी बल्कि इन दस्तावेजों पर बात का कोई महत्व नहीं है.

शाह के बयान पर क्या बोले कांग्रेस सांसद राशिद अल्वी? 
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, ‘पिछले 12 सालों से बीजेपी मुसलमानों के खिलाफ काम कर रही है. क्या UCC से आर्थिक स्थिति सुधरेगी? क्या UCC से बेरोजगारी खत्म होगी? क्या UCC से पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी? आप इसे 21 राज्यों में लागू करना चाहते हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब ही है सिविल कानूनों में एकरूपता, अभी हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं. आप इन कानूनों को 21 इलाकों में लागू करने जा रहे हैं. यह बस मुसलमानों के खिलाफ जिद है. बेरोजगारी या आर्थिक स्थिति BJP नेताओं की प्राथमिकता नहीं है. ट्रिपल तलाक, यूनिफॉर्म सिविल कोड, मस्जिद-मंदिर और हिंदू-मुसलमान ही आपके एजेंडे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने इस देश को बर्बाद करने की पूरी ठान ली है.’

शाह किसी कीमत पर नहीं कर सकते यूसीसी लागू: वकार आसिम
कांग्रेस नेता ने आसिम वकार ने यूसीसी पर शाह के बयान पर कहा है कि मैं अमित शाह से गुजारिश करता हूं कि वे जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की बात कर रहे हैं, उसे लागू करें. भारत जैसे अलग-अलग धर्मों और सभ्यताओं वाले देश में UCC लागू नहीं किया जा सकता.

वकार ने आगे कहा, ‘अगर अमित शाह ने संविधान पढ़ा होता, तो उन्हें पता होता कि यह लोगों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों, जैसे पूजा-पाठ और शादी-ब्याह से जुड़े मामलों को मानने का अधिकार देता है. सबसे पहले सारा डेटा इकट्ठा करें और उसे देश के सामने रखें. मैं गारंटी देता हूँ कि अमित शाह किसी भी कीमत पर भारत में UCC लागू नहीं कर सकते.’

बिहार में लागू नहीं होगा यूसीसी: जदयू नेता
जेडीयू के सीनियर विधायक पूर्व मंत्री रहे श्याम रजक ने कहा है कि हमने संसद में इस कानून का समर्थन जरूर किया है, लेकिन हमने इस सयम कह दिया था कि हम अपने राज्य में लागू नहीं करेंगे. बिहार में यूसीसी लागू नहीं होगा. 

अभी किन-किन राज्यों में लागू है यूसीसी? 
UCC की मौजूदा स्टेज पर नजर डालें तो उत्तराखंड में यह कानून पूरी तरह लागू है. फरवरी 2024 में कानून पास हुआ और जनवरी 2025 से लागू है. गुजरात में विधानसभा से बिल पास, अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार रह गया है. असम विधानसभा से यूसीसी बिल पास हो चुका है, लेकिन अभी लागू नहीं है. मध्य प्रदेश कैबिनेट से बिल मंजूर होकर विधानसभा में पेश/पारित होने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अगला बड़ा चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है.

xराजस्थान में UCC Bill, 2026 विधानसभा में पेश हो चुका है, लेकिन अभी पास नहीं हुआ. 21 अगस्त को बिल पेश हुआ था.  महाराष्ट्र में ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है. रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति बिल का मसौदा तैयार कर रही है. विधानसभा में बिल अभी नहीं आया. यानी कि उत्तराखंड में लागू है. गुजरात, असम और एमपी में बिल पास हो चुका है, बस राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है. राजस्थान में बिल विधानसभा में पेश हो चुका है. महाराष्ट्र में ड्राफ्टिंग/ समिति स्तर पर अभी काम जारी है. 





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